भेदभाव पूर्ण शिक्षा देना आरटीई कानून का उल्लघंन है : क्रिष्टोफर पॉल

सभी सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को स्वामी आत्मानंद में समायोजित करने की मांग

रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा वर्ष 2018 में हर विकासखंड में एक प्रायमरी और एक मिडिल अंग्रेजी माध्यम के स्कूल आरंभ किए गए थे और पूरे प्रदेश में 153 प्रायमरी और 153 मिडिल अंग्रेजी माध्यम के स्कूल संचालित हो रहे है, लेकिन बीते वर्ष सरकार ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल संचालित करने का निर्णय लिया गया और इस वर्ष 171 स्कूल पूरे प्रदेश में संचालित हो रहे है।

स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को सबसे बढ़ीया प्रायवेट स्कूलों की तर्ज पर सर्वसुविधायुक्त बनाया गया है और धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने, लिखने और पढ़ने वाले शिक्षकों की नियुक्ति किया गया, लेकिन वहीं दूसरी ओर सरकारी अंग्रेजी माध्यम से स्कूलों की स्थिति बेहद खराब है, क्योंकि इन स्कूलों में सभी सुविधाओं का अभाव है, जबकि दोनों ही सरकारी अंग्रेजी माध्यम की स्कूलें है और दोनों स्कूलों में अध्ययनरत् बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का दायित्व सरकार की है।
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने बताया कि सरकार के द्वारा दो प्रकार का अंग्रेजी माध्यम स्कूल संचालित किया जा रहा है, एक सर्वसुविधायुक्त है तो दूसरा सुविधाहीन है, जबकि संविधान और शिक्षा का अधिकार कानून भेदभाव पूर्ण शिक्षा प्रदान करने का विरोध करता है, क्योंकि सभी बच्चों को एक समान अधिकार के साथ एक समान गुणवत्ता वाली शिक्षा दिया जाना चाहिए।

श्री पॉल का कहना है कि सरकार को सुनियोजित योजना बनाना चाहिए, ताकि इस प्रकार के भेदभाव पूर्ण शिक्षा को समाप्त किया जा सके, क्योंकि ऐसी शिक्षा संविधान और शिक्षा अधिकार कानून का भी उल्लघंन है, इसलिए सरकार से हमारी मांग है कि सभी सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में समायोजित कर दिया जाए।

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