Warning: mysqli_real_connect(): Headers and client library minor version mismatch. Headers:50562 Library:100138 in /home/u485839659/domains/clipper28.com/public_html/wp-includes/wp-db.php on line 1612
छत्तीसगढ़ में घर वापसी की तैयारी में सलवा जुड़म के विस्थापित आदिवासी

छत्तीसगढ़ में घर वापसी की तैयारी में सलवा जुड़म के विस्थापित आदिवासी

रायपुर।

छत्तीसगढ़ में सरकार बदलने के बाद नक्सल नीति में बदलाव की सुगबुगाहट है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शपथ लेते ही कहा कि हम नक्सल पीड़ित आदिवासियों से बातचीत करेंगे। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद उन हजारों आदिवासियों की उम्मीद जागी है जो वर्षों से आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में विस्थापित जिंदगी जी रहे हैं।

नक्सल नीति बदलने के संकेतों के बीच आदिवासी घर वापसी करने को भी तैयार होने लगे हैं। हाल ही में तेलंगाना में बसे 15 आदिवासी परिवारों ने अपने गांव वापस लौटने की मंशा जताई है। बस्तर में शांति के लिए काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता शुभ्रांशु चौधरी से इन परिवारों ने मदद मांगी है। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि विस्थापित आदिवासियों को वापस लाने के लिए सरकार भी नीति बना रही है।

पड़ोसी राज्यों में गए आदिवासी

जुडूम के दौरान कई गांव जलाए गए, हत्या, बलात्कार आदि के आरोप भी लगे। इस स्थिति से परेशान होकर सुकमा और बीजापुर जिलों के जंगलों से बड़े पैमाने पर आदिवासियों ने पलायन किया। सरकार के पास कोई आंकड़ा नहीं है कि कितने आदिवासी दूसरे राज्यों में हैं। कुछ स्वयंसेवी संगठन 20 से 30 हजार बताते हैं तो कुछ एक लाख तक। हाल ही में तेलंगाना में चुनाव प्रचार कर लौटे कांग्रेस के विधायक कवासी लखमा कहते हैं कि बार्डर के पास करीब डेढ़ लाख आदिवासी हैं।

यह है सलवा जुड़ूम

वर्ष 2005 में नक्सल विरोधी अभियान सलवा जुड़ूम चलाया गया। पुलिस और नागरिकों की मदद से चले इस अभियान के दौरान अंदरूनी इलाकों के छह सौ से ज्यादा गांव खाली हो गए। गांवों से विस्थापित आदिवासियों को सरकार ने थानों और पुलिस कैंपों के आसपास बसाया। ऐसे 42 सलवा जुड़ूम कैंप बनाए गए थे। इस दौरान जुड़ूम समर्थकों और फोर्स पर आदिवासियों से अत्याचार के कई आरोप लगे। मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया। 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने सलवा जुड़ूम के खिलाफ निर्णय दिया।

new jindal advt tree advt
Back to top button