राजस्व प्रकरणों में बिना चुकारा नहीं होता है निपटारा : रिजवी

रायपुर।

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के मीडिया प्रमुख एवं वरिष्ठ अधिवक्ता इकबाल अहमद रिजवी ने कहा है कि यह आम चर्चा है कि राजस्व अदालतों में ज्यादातर मुकदमों में यह देखा गया है कि बिना चुकारा निपटारा नहीं होता है। वरना वर्षों तक जल्द निपटारा हो सकने वाले प्रकरणों में भी लाखों प्रकरणों की फाइले धूल खाती पड़ी हुई है।

जनता के लिए जल्द न्याय पाना इन अदालतों में दिवा स्वप्न के समान है। अदालतों का चक्कर काटते-काटते पक्षकारों के जूते घिस जाते है तथा थककर प्रकरण को उसके हाल पर छोड़कर घर बैठ जाना उपयुक्त समझते है।

कई पक्षकार तो इस बीच ऊपर सिधार जाते है। यही कारण है कि प्रदेश के विभिन्न अदालतों में लाखो की संख्या में प्रकरण लंबित है। भाजपा सरकार में आर्थिक रूप से कमजोर पक्षकार को न्याय मिल पाना असंभव हो चुका है।

रिजवी ने कहा है कि शासन-प्रशासन प्रदेश की विभिन्न प्रजाति की राजस्व भूमि जैसे-आबादी, घास, चारागाह एवं गौठान पर आदतन बेजा कब्जाधारियों एव रसूखदारों का कब्जा बढ़ता ही जा रहा है तथा अधिकांश गांवों के सरपंच, सचिव एवं हल्का पटवारी की मिलीभगत से प्रदेश की राजस्व भूमि की बंदरबांट बदस्तूर जारी है। चर्चा है कि बडे़ शहरों से लगी आबादी भूमि की 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपए प्रति डिसमील भूमि की कीमत तय कर दी गयी है।

यदि सरकार इस गंभीर विषय पर अंकुश लगाने कडे़ नियम नही बनाती है तो वह दिन दूर नही जब गांवों में राजस्व की एक इंच जमीन भी बच पाना नामुमकिन होगा। एक षडयंत्र के तहत सम्बंधित पक्ष लाखों करोड़ो की बेशकीमती जमीन को हड़पने का अभियान चलाया जा रहा है।

रिजवी ने कहा है कि इस दिशा में अंकुश लगाने अंग्रेज शासनकाल का लगभग दो सौ साल पुराना रेवेन्यू बुक सर्कुलर अप्रसांगिक हो चुका है।

कडे़ नियमों वाला भय मिश्रित एक्ट बनाकर शासकीय नजूल एवं ग्रामीण अंचल की राजस्व भूमि को अतिक्रमण से रोका जा सकता है ताकि अतिक्रमणकर्ता के दिलों दिमाग में भय उत्पन्न हो सके तब कही जाकर शासकीय भूमि की अफरा-तफरी पर रोक लग सकेगी।

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