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तिरंगा फहराने को लेकर हुआ विवाद, बीजेपी कार्यकर्ता की कथित तौर पर पीट पीटकर हत्या

मामूली कहासूनी से शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया

नई दिल्ली:पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के खनाकुल क्षेत्र में स्वतंत्रता दिवस के दिन राष्ट्रध्वज फहराने को लेकर हुए विवाद में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी के एक कार्यकर्ता की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी.

जानकारी मिली है कि नातिबपुर में टीएमसी औप बीजेपी दोनो अपनी पार्टी ऑफिस के बाहर तिरंगा फहराने के लिए जमा हुए थे. लेकिन थोड़ी ही देर में दोनो दलों के कार्यकर्ता के बीच मामूली कहासूनी से शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया.

बीजेपी ने आरोप लगाते हुए कहा है कि सुदर्शन प्रमाणिक नाम के इस शख्स को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने पीट पीटकर मार डाला. आरामबाग में बीजेपी प्रभारी बिमान घोष ने आरोप लगाते हुए कहा, ”सुदर्शन बूथ लेवल के काफी सक्रिय कार्यकर्ता थे. वो शनिवार सुबह तिरंगा फहराने की तैयारी कर रहे थे.

लेकिन टीएमसी के गुंडों ने उनपर हमला कर, उनकी हत्या कर दी. मुझे नहीं पता कि बंगाल को टीएमसी के जंगलराज से मुक्त करने के लिए आगे कितने बीजेपी नेताओं को अपने जान की कुर्बानी देनी होगी.”

बीजेपी हिंसा के जरिए प्रदेश में अराजकता

हालांकि हुगली जिले के टीएमसी अध्यक्ष दिलीप यादव ने सभी आरोप को गलत बताते हुए कहा कि विवाद बीजेपी के अंदर ही दो गुटों में हुआ था. इसका टीएमसी से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा, ‘टीएमसी का इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. बीजेपी हिंसा के जरिए प्रदेश में अराजकता फैलाना चाहती है. मेरी लोगों से अपील है कि वो इस तरह की राजनीति का विरोध करें.’

इस घटना के विरोध में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने सांसद सौमित्र खान और ज्योतिर्मय महतो के नेतृत्व में कोलकाता प्रदेश हाईवे को ब्लॉक कर दिया और मृत कार्यकर्ता के शव के साथ प्रदर्शन किया. जिसके बाद पुलिस ने भीड़ हटाने के लिए हल्के लाठी-चार्ज का प्रयोग किया. इस घटना के विरोध में बीजेपी ने रविवार को खनाकुल बंद का आह्वान किया है.

वहीं हुगली जिला पुलिस अधीक्षक तथागत बसु ने इस मामले को लेकर कहा कि इस मामले को लेकर 11 लोगों को हिरासत में लिया गया है. उन्होंने कहा, ”हमलोग इस मामले में कुछ नहीं कह सकते. हमें अब तक औपचारिक शिकायत तक नहीं मिली है.”

वहीं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि हम सभी पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की हकीकत से पूरी तरह वाकिफ हैं. स्वतंत्रता दिवस के दिन भी हिंसा हो रही है. इसलिए प्रदेश में लोकतंत्र बहाल करने के लिए हमें एक और स्वतंत्रता आंदोलन करना होगा.

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