अमलीडीह का गड्ढा पाटना सत्यनारायण शर्मा के लिए नहीं आसान

नाराज समर्थक हुए बागी, पूछा किस काम के विधायक?

रायपुर।

संयुक्त मध्य प्रदेश में कांग्रेस के कद्दावर नेता माने जाते रहे सत्यनारायण शर्मा अपने राजनीतिक जीवन के सबसे असुविधाजनक विधानसभा चुनाव का सामना कर रहे हैं।

रायपुर ग्रामीण विधानसभा सीट पर एक चुनावी जीत और एक हार दर्ज करने वाले शर्मा से क्षेत्र के मतदाताओं को इस बात की नाराजगी है कि
वह पिछले पांच वर्षों में लोगों के बीच कम सक्रिय रहे।

अब वह सघन प्रचार अभियान पर गांव-गांव जाकर जनसंपर्क कर रहे हैं। इनमें वह जितना समय अब दे रहे हैं,
अगर उस समय का एक ​छोटा सा अंश भी उन्होंने पहले दिया होता तो उनके समर्थक ही उनकी तरफ से मैदान संभाल रहे होते।

सत्यनारायण शर्मा
अमलीडीह का गड्ढा पाटना सत्यनारायण शर्मा के लिए नहीं आसान

यह कहना है रायपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के सबसे बड़े वॉर्ड अमलीडीह के मतदाताओं का

इन मतदाताओं की मानें तो पिछले विधानसभा चुनाव में बमुश्किल 5 हजार मतों से जीत हासिल करने वाले सत्यनारायण शर्मा के लिए इस बार
जीत की डगर काफी चुनौतियों भरी होंगी। कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशियों की जीत की संभावनाएं 50:50 के अनुपात में समान-समान बंटी हैं।

उनका आकलन है कि भाजपा प्रत्याशी नंदे साहू और मौजूदा विधायक सत्यनारायण शर्मा के बीच मुकाबला कांटे का होने वाला है।
खुद को शर्मा का कट्टर समर्थक मानने वाले अमलीडीह के एक मतदाता ने बताया कि अमलीडीह में पिछले कई वर्षों से विकास का कोई काम नहीं हुआ है।

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विकास की कमी के लिए जब पहले राज्य सरकार को दोषी ठहराया जाता था तो स्थानीय लोगों को इस आरोप में दम नजर आता था। वहीं,
आज मतदाता यह सोचने लगा है कि जिस समय रायपुर के अन्य हिस्सों में विकास बदस्तूर जारी है और नतीजा जमीन पर नजर भी आ रहा है तो
सिर्फ शर्मा का विधानसभा क्षेत्र ही वंचित क्यों है? अमलीडीह के ही एक अन्य कांग्रेस समर्थक ने बताया कि इन दिनों
सत्यनारायण शर्मा के पास क्षेत्रवासियों से तो क्या, मीडिया तक से बातचीत करने की फुर्सत नहीं है। वह पांच वर्ष क्षेत्र से गायब रहने के बाद
चुनाव से ऐन पहले मैदानी वर्जिश में जुटकर जंग जीतने की फिराक में हैं।

वहीं, भाजपा के साथ ही आम आदमी पार्टी (आप) भी उनके लिए सिरदर्द बनती जा रही है। आप के प्रदेश अध्यक्ष और रायपुर ग्रामीण क्षेत्र में
ताल ठोंक रहे डॉ. संकेत ठाकुर भी अपनी जनसभाओं में यही सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कांग्रेस के विधायक ने पिछले पांच वर्षों में अपने क्षेत्र से
दूरी क्यों बनाए रखी? उन्होंने क्षेत्र के विकास को नजरअंदाज क्यों किया?

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और महंगाई के खिलाफ सांकेतिक प्रदर्शन करने के लिए बैलगाड़ी पर सवार होकर विधानसभा घेरने के लिए पहुंचे
सत्यनारायण शर्मा ने क्षेत्र का क्या भला कर दिया?

कांग्रेस नेता और यहां तक कि सत्यनारायण शर्मा तक आप की राजनीतिक अनदेखी करने को अधिक बेहतर रणनीति मानते हैं।
वहीं, चुनावी मौसम में आप का यह कहना काफी गंभीर असर दिखा सकता है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा का विकल्प कांग्रेस कतई नहीं हो सकती।

अगर सत्यनारायण शर्मा इसका विश्वसनीय और सटीक उत्तर देने में कामयाब नहीं होते हैं तो उन्हें इसका नुकसान झेलना पड़ सकता है।

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