बिलाईगढ़ में 19 को होगा अनोखा एतिहासिक राजा दशहरा पर्व

दशमी को सुबह से ही ग्राम बैगा एवं राज परिवार द्वारा ग्राम पुजा

योगेश केशरवानी :
बिलाईगढ़ :

वैसे तो विजयदशमी पुरे देश में मनाया जाता है। लेकिन बिलाईगढ़ का एतिहासिक राजा दशहरा पर्व अपने आप मे एक अलग महत्व रखता है। जहाँ नौ दिन बुढी माई मे जँवारा स्थापना वहीं दूसरी ओर दशमी को सुबह से ही ग्राम बैगा एवं राज परिवार द्वारा ग्राम पुजा।

तत्पश्चात राजमहल से शाही सवारी पुरे लौहलश्कर एवं राजशाही वेशभूषा में विजय मैदान (रैनीभाँठा) प्रस्थान किया जाता है। जहाँ आदिवासी क्षेत्रों से आए युवाओं द्वारा तीरँदाजी..गढ तोडाई एवं राजपरिवार द्वारा सभा सँबोधन किया जाता है ।

बिलाईगढ़ मे रावण दहन नही किया जाता। बिलाईगढ़ के राजा ओँकारेश्वर शरण सिंह जी बताते हैं कि लगभग सौ साल पहले से बिलाईगढ़ के तत्कालीन जमींदार राजा हरदयालसिंह जी को दशहरा के दिन ही पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई जिनका नामकरण जितेन्द्र विजय बहादुर सिंह के रूप में हुआ।

हरदयाल सिंह जी ने दशहरा पर्व बडे धूमधाम से मनाया उसके बाद उनके पुत्र जितेंद्र विजय बहादुर सिंह जी ने अपनी पुष्तैनी परँपरा का बडी धूमधाम से निर्वहन किया आगे वर्तमान राजा ओँकारेश्वर शरण सिंह जी बताया कि सँयोग से मेरे ज्येष्ठ सुपुत्र का जन्म भी दशहरा के दिन ही हुआ है।

तब से इस पर्व को सपरिवार बडे धुमधाम से मनाते हैं। राजा साहब ने आगे बताया किन 15 दिन पहले से ही तैयारी शुरू हो जाती है। जहां आसपास सहित सैकड़ों किलोमीटर दूर से लोग अपने राजशाही दशहरा देखने आते हैं वहीं बाहर से आए लोगों के लिए महल मे भोजन ब्यवस्था व रात्रि में मनोरंजन की जगह जगह कार्यक्रम आयोजित रहती है।<>

वहीं जब क्लीपर 28 की टीम ने राज महल बिलाईगढ़ के राजा ओँकारेश्वर शरण सिंह जी से पूछा तो उनके द्वारा बताया गया कि इस वर्ष और भी विजयदशमी का पर्व पुरे जोरशोर एवं धुमधाम से मनाया जाएगा।

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