राजधानी में गणेश उत्सव की तैयारियों के बीच जिला प्रशासन की गाइडलाइन

समितियों ने जिला प्रशासन की ओर से जारी गाइडलाइन का विरोध करने फैसला लिया

रायपुर: राजधानी में कोरोना संक्रमण बढ़ने की संभावनाओं के देखते हुए जिला प्रशासन ने कुछ नियमों व शर्तों के साथ गणेशोत्‍सव मनाने की अनुमति दी है। प्रशासन की सख्त गाइडलाइन के बीच अब समितियों आयोजन को लेकर ही मजधार में उलझी नजर आ रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह गणेशोत्सव स्थल के सामने पांच हजार वर्गफीट जमीन, सीसीटीवी कैमरे के साथ आयोजन में आने वाले लोगों के संक्रमित होने पर उपचार के खर्च जैसे नियम है.

इन नियमों के बीच एक बार फिर तय है की गणेशोत्सव के दौरान न स्थल सजावट देखने मिलेगा, न विसर्जन झांकियां निकाली जा सकेंगी। आलम यह है, समितियों ने जिला प्रशासन की ओर से जारी गाइडलाइन का विरोध करने फैसला लिया।

गणेश प्रतिमाओं की स्थापना के लिए पंडाल वाले स्थल के ठीक सामने 5000 वर्गफीट खाली जगह के नियम के चलते आयोजन कर पाना संभव नहीं है। समितियों ने जल्द कलेक्टर से मुलाकात कर नियम बदलने की बात कही है।

समितियों का कहना है, कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराने जारी गाइडलाइन की वजह से आयोजन हो पाना मुश्किल है। शहर में हर साल 50 से 55 करोड़ रूपए की राशि गणेशोत्सव की रौनक बढ़ाने खर्च की जाती है, लेकिन कोविड प्रोटोकॉल की वजह से अब प्रशासन ने सख्त नियम लागु कर दिया है.

ज्यादातर आर्डर फस गए उलझन में

समितियों के सदस्यों का कहना है, गणेश प्रतिमाओं के लिए तीन महीने पहले ही आर्डर दे दिया गया है. ज्यादातर मूर्तिकारों को 8 से 10 फीट की प्रतिमाएं बनाने के लिए आर्डर बुक है। नए आदेश के बाद मामला पूरी तरह उलझ गया है। 20 से 25 हजार रूपए की लगत राशि तय किए जाने के बाद 5 -5 हजार रूपए तक एडवांस भी दे दिए गए है। माना, धमतरी और शहर के बाकी हिस्सों में मूर्तिकार भी उलझन में पड़ गए है।

झांकी-सांस्कृतिक कार्यक्रम बहुत कुछ

कोरोनाकाल के पहले तक रायपुर में गणेशोत्सव के दौरान स्थल सजावट और झांकी की परंपरा रही है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता रहा है। साथ ही विसर्जन कार्यक्रमों में भी झांकी और अन्य मदों में करोड़ो रूपए खर्च किए जाते थे।

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