छत्तीसगढ़

डॉक्टर, कर्मचारियों की लापरवाही पर जिला अस्पताल प्रबंधन मौन

यहां उपचार न होना, उपचार के एवज में रुपए मांगना और मरीजों से दुर्व्यवहार की शिकायत आम

भरत सिंह

बिलासपुर : जिला अस्पताल प्रबंधन लापरवाह बिलासपुर और कर्मचारियों को बचाने में जुटा है। स्टाफ की मनमानी से मरीज उपचार से वंचित हो रहे हैं। जबकि शिकायत नहीं मिलने का हवाला देकर प्रबंधन पल्ला झाड़ लेता है। यहां तक कि पूछताछ भी नहीं की जाती है। जिला अस्पताल में मरीजों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। यहां उपचार न होना, उपचार के एवज में रुपए मांगना और मरीजों से दुर्व्यवहार की शिकायत आम है।

इसकी जानकारी प्रबंधन को भी है। लेकिन आरोपी कर्मचारियों और डॉक्टरों के खिलाफ जांच तक नहीं की जाती। बीते तीन महीने के भीतर इस तरह से छह से ज्यादा मामले हुए हैं। हर बार प्रबंधन शिकायत नहीं मिलने की बात कहकर मामला टाल देता है। इसकी वजह से दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और वे बेखोफ होकर मनमर्जी करते हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है।

बता दें कि जिला अस्पताल के कर्मचारी मरीजों व परिजन को शिकायत करने नहीं देते हैं। हालांकि जगह-जगह शिकायत पेटी लगाई गई हैं। इनमें ताला नहीं लगाया गया है। इनमें डाली गई शिकायत को प्रबंधन तक नहीं पहुंचने दिया जाता। छह मई को जांजगीर-चांपा की गणेशी बाई प्रसव कराने पहुंची थी। उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई थी। डॉक्टर ने बिना जांच किए ही महिला को गंभीर बता दिया।

गणेशी को सिम्स ले जाना पड़ा। रास्ते में ही प्रसव शुरू हो गया और सिम्स गेट में उसने बच्चे को जन्म दिया। प्रबंधन ने शिकायत नहीं मिलने की बात कहकर मामला टाल दी। 12 मई सोनोग्राफी सेंटर में सुबह से लोगों की भीड़ लगी थी। लेकिन डॉक्टर अंदर अखबार पढ़ते रहे। बाद में कह दिया कि आज सोनोग्राफी नहीं होगी। दो दिन बाद आना। मुंगेली की प्रियंका मिरी और सीपत के ग्राम नरगोड़ो की सावित्री बाई समेत अन्य मरीज परेशान हुए। आधे घंटे तक हंगामा भी मचाया। प्रबंधन ने फिर जानकारी नहीं होने की बात कह दी।

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