दिव्यांग खुशबू ने कम्प्यूटर चलाकर सिद्ध किया जहां चाह वहां राह

जगदलपुर: दृढ़ इच्छा शक्ति और लगन से शारीरिक बाधा भी आसानी से पार की जा सकती है। दिव्यांग खुशबू ने कम्प्यूटर चलाकर यह सिद्ध किया जहां चाह वहां राह। इन दिनों बच्चों में सहनशीलता और आत्म विश्वास की कमी नजर आ रही हैं। इस परिस्थिति में दिव्यांग खुशबू का संघर्ष इन बच्चों के लिए मार्ग दर्शक सिद्ध हो सकता है। शहर की खुशबू, उसके दोनों अविकसित हाथ में उंगलियां नहीं हैं इसके बावजूद कम्प्यूटर की बोर्ड आसानी से संचालित करती है।
मुख्य वन संरक्षक कार्यालय में कार्यरत इस युवती के दोनों पैर भी नहीं है। इस शारीरिक कमी को उसने कमजोरी न मानकर दृढ़ इच्छाशक्ति और लगन के साथ लक्ष्य प्राप्ति के लिए न केवल स्कूल की शिक्षा हासिल की बल्कि महाविद्यालय में प्रवेश लेकर कम्प्यूटर में डिप्लोमा भी हासिल किया। वर्तमान में मुख्य वन संरक्षक कार्यालय में अपने हुनर का लोहा मनवा रही है। जीपीएस डाटा रिकार्ड करने वाले कक्ष में प्रवेश करते ही यह युवती कम्प्यूटर पर कार्य करती नजर आती है। इसके पास जो कागज, शीट, डाटा पहुंचते हैं वह उन्हें एक्सल, वर्ड व अन्य फारमेट में तत्काल बदल देती हैं। इसके कार्य से कार्यालय के सहकर्मी भी काफी प्रभावित है। अविकसित हाथ और पैर के सहारे इस युवती का कम्प्यूटर सीखना और टाइपिंग करते देख लोग आश्चर्य में पड़ जाते है। खुशबू ने कहा कि, मां की हिम्मत से आज वह लक्ष्य हासिल कर सकी है। खुशबू की मां धनमती घरेलू कामकाज करने वाली शुरू से अब तक खुशबू को गोद में उठाकर स्कूल, कालेज व वर्तमान में कार्यालय तक पहुंचाती है। सुबह, शाम विभाग में कार्य करने केे बाद वह घर पर अपने पढ़ाई पूरी करने में भी जुटी हैं। इसके साथ ही अपने दो अन्य बहनों की शिक्षा में भी मदद करती है। खुशबू की प्रतिभा से प्रभावित होकर तात्कालीन मुख्य वन संरक्षक तपेश झा ने उसे अपने विभाग में काम करने का अवसर दिया। वर्तमान मुख्य वन संरक्षक वी श्रीनिवास राव के साथ विभाग के सहकर्मियों ने खुशबू के कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि, वह काम को लेकर शिकायत का मौका नहीं देती है। खुशबू ने कहा, अधिकारी जो भी दायित्व देते है उसे पूरा करने का पूरा प्रयास करती हूं। अवसर मिलने पर और भी उंचे ओहदे पर जाने की इच्छा खुशबू ने जाहिर की है।

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