धर्म/अध्यात्मवास्तु

दिवाली स्पेशल : जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, पूजन सामग्री, माँ लक्ष्मी को करें खुश

गुरु तथा लक्ष्मी जी का ध्यान करें

दिवाली के दिन पांच देवताओं, गणेश जी, मां लक्ष्मी, ब्रह्मा,विष्णु और महेश की पूजा होती है। काली रात रोशनी की जगमगाहट से रोशन हो जाती है।कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर दीपावली मनाई जाती है। इस दिन लक्ष्मी पूजन करने की परंपरा है।

दीवाली पूजन सामग्री

सामग्री : रौली, मौली, सुपारी-5, धूप, पान पत्ते-5, लौंग, इलायची-5, कमल गट्टे -20, कमल का फूल, फूल माला, खुले फूल, 5 फल, 5 मिठाई, दूध आधा किलो, दही-250 ग्राम, शहद, केसर, लक्ष्मी-गणेश जी की फोटो या मूर्ति,

आम के पत्ते, कपूर,जनेऊ, चंदन, दूब, मिट्टी के दीये-12 छोटे एक बड़ा, सरसों का तेल, देसी घी, रूई, ज्योति, पंच मेवा पांच मिठाई, चांदी का सिक्का, अष्ट गंध, माता का शृंगार, चावल सवा किलो, शक्कर 50 ग्राम,

खीलें, बताशे, मिठाई, मोमबत्ती, गंगाजल, माचिस, शंख, रेशमी वस्त्र, पीली सरसों, सिंदूर, पंचामृत, हवन सामग्री, जौ, तिल, तुलसी की माला, हवन कुंड, आसन, दक्षिणा आदि।

पूजन विधि

स्नान करें, पूजा के लिए उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख रखें और कोई दरी या कम्बल बिछा लें। द्वार पर रंगोली बना लें। थाली में अष्ट दल बना कर नव ग्रहों की आकृति आटे से बना कर लक्ष्मी जी की प्रतिमा स्थापित करें।

आह्वान करें। अक्षत, पुष्प, अष्टगंध युक्त जल अर्पित करें। दिशा रक्षण के लिए बाएं हाथ से पीली सरसों लेकर दाएं हाथ में ढंक कर चारों दिशाओं में फैंकें।

गणेश जी, लक्ष्मी जी व सरस्वती जी की मूर्तियां रखें। चौकी पर लाल वस्त्र बिछा कर थाली रखें। कलश, धूप दीप रखें। कलश में जल भर कर उसमें गंगाजल, थोड़े से चावल, एक चांदी का या प्रचलित सिक्का डाल दें।

कलश पर आम के 5 या 7 पत्ते रखें। पानी वाले नारियल पर 3 या 5 चक्र कलावा या मौली बांधकर कलश पर रख दें। केसर, चंदन से स्वस्तिक बना कर गणेश जी, लक्ष्मी जी व श्रीयंत्र को स्थापित करें। लक्ष्मी जी को गणेश जी के दाएं रखें।

गणेश जी पर अक्षत-पुष्प चढ़ाएं। पंचामृत-दूध, दही, घी, शहद व शक्कर से स्नान कराएं फिर जल डालें। फिर मौली, जल, चंदन, कुमकुम, चावल, पुष्प, दूर्वा, सिंदूर, रोली, इत्र, धूप दीप, मेवे प्रसाद फल पान, सुपारी,

लौंग, इलायची व द्रव्य-11 रुपए बारी-बारी चढ़ाएं। दूध, दही, घी, मधु, शक्कर पंचामृत,चंदन, गंगा जल से प्रतिमा को स्नान करवाएं। वस्त्र, उप वस्त्र, आभूषण, चंदन, सिंदूर, कुमकुम, इत्र, फूल आदि समर्पित करें। लक्ष्मी जी की प्रतिमा के हर अंग को पुष्प से पूजें।

इस मंत्र का जाप करते जाएं : ओम् श्रीं हृीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:

तेल का एक चौमुखी दीपक और 21 छोटे दीपक जलाएं। आचमन करें। प्रथम मूर्तियों पर तिलक लगा कर फिर अपने व अन्य सदस्यों के कलावा बांधें, तिलक लगाएं। गुरु तथा लक्ष्मी जी का ध्यान करें।

मूर्तियों पर चावल, पान, सुपारी, लौंग, फल, कलावा,फल, मिठाई, मेवे आदि चढ़ाएं। अक्षत-पुष्प दाहिने हाथ में लेकर पृथ्वी तथा नव ग्रहों-सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहू, केतु, कुबेर देवता, स्थान देवता, नगर खेड़ा वास्तु देवता, कुल देवी या देवता का आह्वान करें। हाथ जोड़ कर गणपति व अन्य देवी देवताओं को नमस्कार करें। संकल्प लें।

दीपावली पंच देव स्थापना मुहूर्त: सुबह 07:25 से सुबह 09:23 तक। ध्यान रखें, इस समय स्थिर वृश्चिक लग्न रहेगा।

दीपावली शरद सरस्वती पूजन मुहूर्त: सुबह 10:45 से दिन 12:00 तक। यह शुभ काल है।

बही-खाता पूजन मुहूर्त: दिन 14:00 से शाम 15:30 तक। इस समय स्थिर कुंभ लग्न रहेगा।

संध्या कालीन दीपावली पूजन मुहूर्त: शाम 17:27 से रात 20:06 तक। इस समय प्रदोष काल रहेगा।

प्रातः कालीन दीपावली पूजन मुहूर्त: सुबह 07:25 से सुबह 09:23 तक। इस वक्त लाभ-अमृत वेला है।

वृषभकाल दीपावली पूजन मुहूर्त: शाम 17:57 से शाम 19:53 तक। इस समय स्थिर वृष लग्न है।

सिंहकाल दीपावली पूजन मुहूर्त: रात 00:28 से रात 02:45 तक। इस वक्त स्थिर सिंह लग्न है।

महानिशिता काल पूजन मुहूर्त: रात 23:38 से रात 00:31 तक। यह समय कमला साधना का है।

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