कुछ भी करो मगर मोदी-शाह की जोड़ी फिर सत्ता में नहीं आनी चाहिए, 21 दलों से बोले केजरीवाल

नई दिल्ली।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ शनिवार (19 जनवरी) को विपक्ष की महारैली आयोजित की गई। इस रैली में 22 पार्टियों के नेताओं ने हिस्सा लिया। कोलकाता के ‘‘ब्रिगेड परेड ग्राउंड में ऐतिहासिक ‘‘एकजुट भारत रैली’’ में एक पूर्व प्रधानमंत्री, 4 मुख्यमंत्री, 6 पूर्व मुख्यमंत्री सहित दर्जनभर पूर्व केंद्रीय मंत्रियों ने पीएम नरेंद्र मोदी को भगा देश को बचाने की हुंकार भरी।

इस दौरान आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी मौजूद रहे। उन्होंने वहां मौजूद 21 दलों के नेताओं और रैली में आए हुए लाखों जनता से कहा कि कुछ भी करो मगर मोदी-शाह की जोड़ी फिर सत्ता में नहीं आनी चाहिए।

सीएम केजरीवाल ने लोगों से केंद्र में ‘‘खतरनाक’’ भाजपा सरकार को किसी भी कीमत पर हराने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश गंभीर संकट के दोराहे पर है। देश और लोकतंत्र को बचाने के लिए मोदी सरकार को तुरंत बदलने की जरूरत है।

तृणमूल कांग्रेस की विशाल रैली में उन्होंने कहा, ‘‘अगर (नरेंद्र) मोदी-(अमित) शाह की जोड़ी 2019 का चुनाव जीतकर देश में शासन करती रही तो वह संविधान को बदल देगी और कभी चुनाव नहीं करवाएगी। जर्मनी में हिटलर ने जो किया था, वही होगा।’’ उन्होंने भाजपा पर धर्म के नाम पर लोगों के बीच दुश्मनी फैलाने का आरोप लगाया।

ब्रिगेड परेड मैदान में केजरीवाल ने कहा, ‘‘पाकिस्तान का सपना देश को टुकड़ों में बांटने का था। भाजपा सरकार लोगों के बीच रंजिश फैलाकर और धर्म, भाषा के नाम पर राष्ट्र को बांटने कर प्रयास कर उस दिशा में आगे बढ़ रही है।

’’ केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में वह रोजगार के अवसर पैदा करने में नाकाम रही है और किसान भीषण दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘नोटबंदी ने रोजगार के सारे अवसरों को खत्म कर दिया और मोदी की मित्र बीमा कंपनियां किसानों के नाम पर पैसे बना रही है।’’ उन्होंने कहा कि आम चुनाव का लक्ष्य अगले प्रधानमंत्री को खोजना नहीं बल्कि मोदी और उनकी पार्टी को हटाना है।

इस रैली में पूर्व प्रधानमंत्री एवं जनता दल सेक्यूलर प्रमुख एच डी देवेगौड़ा, चार वर्तमान मुख्यमंत्री – चंद्रबाबू नायडू (तेलुगु देशम पार्टी), एचडी कुमारस्वामी (जनता दल सेक्यूलर) और अरविंद केजरीवाल (आम आदमी पार्टी), ममता बनर्जी (तृणमूल कांग्रेस) छह पूर्व मुख्यमंत्री – अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी), फारुख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला (दोनों नेशनल कांफ्रेंस), बाबूलाल मरांडी (झारखंड विकास मोर्चा), हेमंत सोरेन (झारखंड मुक्ति मोर्चा) और इसी हफ्ते भाजपा छोड़ चुके गेगांग अपांग, आठ पूर्व केंद्रीय मंत्री- मल्लिकार्जन खड़गे (कांग्रेस), शरद यादव (लोकतांत्रिक जनता दल), अजित सिंह (राष्ट्रीय लोक दल), शरद पवार (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी), यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी, शत्रुघ्न सिन्हा और राम जेठमलानी ने हिस्सा लिया।

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