म्युचुअल फंड का चयन सिर्फ एक साल के रिटर्न से न करें

नई दिल्ली। म्युचुअल फंड में निवेश के बारे में ऑनलाइन सारी जानकारी उपलब्ध है और नई पीढ़ी में किसी एजेंट की मदद की बजाय सीधे निवेश करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। म्युचुअल फंड में निवेश के पहले आमतौर पर लोग कंपनियों के एक साल के रिटर्न पर ही ध्यान देते हैं और कंपनियों से जुड़े जोखिम, पृष्ठभूमि को जरा भी तवज्जो नहीं देते हैं। ऐसे में उन्हें निवेश पर नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को कंपनी के लंबी अवधि के प्रदर्शन को देखना चाहिए और आखिरी साल उसमें गिरावट भी आई है तो उसके समुचित कारण हो सकते हैं और आगे वह अच्छा रिटर्न भी दे सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सही है कि ऑनलाइन निवेश से निवेशक फंड सलाहकार की व्यक्तिगत पसंद से बेहतर चुनाव कर सकते हैं। लेकिन ऐसा आंख मूंदकर करना ठीक नहीं है।

ऑनलाइन निवेश की वजह

1. ज्यादातर योजनाओं में ऑनलाइन निवेश करना सस्ता पड़ता है, इसमें आप कई तरह के शुल्क या कमीशन से बच जाते हैं। केवाईसी भी स्वचालित तरीके से हो जाती है और दो-चार मिनट की प्रक्रिया में पूरा आवेदन फॉर्म भर जाता है।

2. अगर किसी सलाहकार की मदद से निवेश करते हैं तो वह उसी फंड में पैसा लगाने के लिए प्रेरित करता है, जिसमें उसका हित जुड़ा हो या जो उसकी पसंद की कंपनी हो। ऑनलाइन निवेश में आप विकल्प खुद तय कर सकते हैं।

3. म्युचुअल फंड में आप अपने समय और पसंद के अनुसार निवेश करते हैं। इसमें सौ रुपये से भी एसआईपी निवेश कर सकते हैं। जबकि फंड मैनेजर आपको 500-1000 या ज्यादा बड़ी एसआईपी करने के लिए प्रेरित करेगा।

इन तीन गलतियों से बचें

1. विशेषज्ञों का कहना है कि आयु, आय और अन्य परिस्थितियों के हिसाब से निवेशकों के लिए बेहतर म्युचुअल फंड अलग-अलग हो सकता है। सिर्फ रिटर्न ही चयन का पैमाना नहीं हो सकता है। ऐसे में वित्तीय सलाह जरूर लें, फिर चाहें निवेश अपनी इच्छानुसार करें।

2. वर्ष 2017 में ज्यादातर ऑनलाइन निवेशकों ने मिड या स्मॉल कैप फंड में निवेश किया। हालांकि 2018 में हालात बदल गए और लार्ज कैप निवेशकों ने ही ज्यादा बेहतर रिटर्न दिया। ऐसे में किसी एक फंड में पूरा पैसा लगाना समझदारी नहीं है।

3. विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर निवेशक बाजार में सालाना बढ़ोतरी को देखते हैं, लेकिन उतार-चढ़ाव को भूल जाते हैं। अगर किसी एक साल बाजार ने 10-12 फीसदी उछाल पाया है तो जरूरी नहीं है कि दूसरे साल भी ऐसा हो। वर्ष 2014 के बाद कई बार बाजार 35 हजार से 39 तक पहुंचने के बाद दोबारा 35 हजार तक आया है।

– 10 साल किसी फंड के उतार-चढ़ाव को देखकर रिटर्न करें
– 100 फीसदी पैसा किसी एक फंड में डालना समझदारी नहीं
– 76% फंड ने नकारात्मक रिटर्न दिया वित्त वर्ष 2018-19 में

Back to top button