छत्तीसगढ़

मत उलझो हमसे, हमसे लडऩा मुश्किल होगा, वरना लिखेंगे ऐसा इतिहास कि पढऩा भी मुश्किल होगा: अजय चंद्राकर

वर्मा ने गोडसे और सावरकर को जोड़कर चंद्राकर पर हमला किया

रायपुर: भाजपा नेता व पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने ट्विटर और फेसबुक पर लिखा कि- छत्तीसगढ़ के वर्तमान राजकीय चिन्ह को नरवा, गरवा, घुरवा, बारी की अपार सफलता और छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में “गोबर” के महत्व को देखते हुए इसे राजकीय प्रतीक चिन्ह बना देना चाहिए.

अब इस ट्विट को लेकर चंद्राकर ने सुबह एक बार और ट्वीट किया- मत उलझो हम से, हमसे लडऩा मुश्किल होगा, वरना लिखेंगे ऐसा इतिहास कि पढऩा भी मुश्किल होगा। इसके जवाब में सीएम के सलाहकार गर्ग ने लिखा-पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है, जाने न जाने गुल ही न जाने बाग तो सारा जाने है।

वर्मा ने गोडसे और सावरकर को जोड़कर चंद्राकर पर हमला किया। उन्होंने लिखा- गोरों से माफी मांगी, गांधी को गोली मारी, जब लडऩे की बारी आई, तब पीठ दिखाकर भागे हो, गोडसे की जय जयकार करो, कायर को तुम वीर कहो, इतिहास लिखने की बारी आई, तब झूठ बोलकर भागे हो।

इस विषय को लेकर जब एकात्म परिसर में पत्रकारों ने भाजपा नेताओं से सवाल किया तो वे भी बचते नजर आए और कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने कहा कि गोबर खरीदने का विरोध नहीं है। बाद में चंद्राकर ने एक और ट्वीट कर हल्दीघाटी की लड़ाई पर लिखी कविता के जरिए योजना पर टिप्पणी की।

अटलजी की श्रद्धांजलि सभा में ठहारे लगा रहे थे चंद्राकर : त्रिवेदी

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि भाजपा नेता चंद्राकर को आज इस बात की तकलीफ है कि भूपेश सरकार क्यों गाय और गोबर को सम्मान देने की बात कर रही है। इस बात को भुलाया नहीं जा सकता कि परंपरा और संस्कृति की बात करने वाले चंद्राकर, अटल बिहारी वाजपेयी की श्रद्धांजलि सभा में ठहाके लगाते दिखाई दिए थे।

त्रिवेदी ने कहा कि यह सच है कि भाजपा ने गौरक्षा के नाम पर प्रदेशभर में गौ शालाएं बनवाईं। 15 साल के रमन सरकार में उनको करोड़ों का अनुदान मिलता रहा। अंतत: भाजपा के नेता गौ सेवा करने वाले नहीं गौ माता को मारकर चमड़े, हड्डी और मांस का व्यापार करने वाले निकले।

ऐसा एक से अधिक जगहों पर हुआ। कांग्रेस रिसर्च विभाग के अध्यक्ष इदरीश गांधी ने चंद्राकर से सफाई देने के बजाय सार्वजनिक रूप से माफी मांगने कहा है। गांधी ने पूछा कि प्रतीक चिह्न बदलाव के पीछे उनकी मंशा क्या थी?

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