इन 5 कार्यों के समय रुद्राक्ष भूलकर भी धारण नहीं करें

हिंदू मान्यताओं में रुद्राक्ष का काफी महत्व है। इसे साक्षात भगवान शिव का अंश माना गया है। ऐसी मान्यता है कि रुद्राक्ष शिव के आंसुओं से बने हैं। कहा जाता है माता सती के देह त्याग के बाद भगवान शिव के रुदन से निकले आंसू पृथ्वी पर कई जगह गिरे और उनसे प्रकृति को रुद्राक्ष के रूप में एक चमत्कारिक तत्व की प्राप्ति हुई।

लाभ के लिए रुद्राक्ष धारण करने के नियम : शास्त्रों और पुराणों के अनुसार रुद्राक्ष धारण करना भगवान शिव के दिव्य स्वरूप को धारण करने के समान माना गया है। विज्ञान भी मानता है इसे धारण करने से स्वस्थ्य लाभ मिलता है। अगर आप इसे धारण करना चाहते हैं या धारण कर रहे हैं तो इसके कुछ नियमों का जरूर पालन करना चाहिए तभी आपको पूरा लाभ मिल सकता है।

जब घर में आए यह खुशी रुद्राक्ष धारण ना करें : प्रसूति कक्ष यानी जहां बच्चे का जन्म हुआ हो उस कक्ष में रुद्राक्ष धारण करके नहीं जाना चाहिए जब तक बच्चे का जातकर्म ना हो जाए। इसका कारण यह माना जाता है कि भगवान शिव जीवन-मृत्यु से परे हैं, इसलिए उनके अंशस्वरूप रुद्राक्ष को जीवन और मृत्युवाले स्थानों पर नहीं धारण करना चाहिए। दूसरी वजह यह है कि इससे रुद्राक्ष निस्तेज हो जाता है।

सोते समय उतार दें रुद्राक्ष : रुद्राक्ष को सोने से पहले उतार देना चाहिए। इसकी वजह यह है कि इस समय शरीर निस्तेज और अशुद्ध रहता है। वैसे व्यवहारिक तौर पर रुद्राक्ष टूटने का डर भी रहता है, जिससे सोते समय इसे उतारने का विधान है। माना जाता है तकिए के नीचे रुद्राक्ष रखकर सोने से आत्मिक शांति मिलती है और बुरे सपने नहीं आते हैं।

स्त्री पुरुषों को इस समय रुद्रक्ष नहीं धारण करना चाहिए : संभोग के समय रुद्राक्ष धारण नहीं करना चाहिए। वहीं स्त्रियों को भी मासिक धर्म के समय रुद्राक्ष धारण करने की मनाही है। क्योंकि इस समय शरीर को अशुद्ध माना गया है।

तामसिक भोजन से रखें परहेज : इसे धारण करनेवाले व्यक्ति को तामसिक भोजन और मदिरापान का त्याग करना चाहिए। ग्रहण, संक्रांति, अमावस्या और पूर्णिमा, शिवरात्रि, सावन सोमवार, चतुर्दशी के दिन इसे आप धारण करें तो अधिक शुभ फलदायी होता है।

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