क्रोध पर रखें धैर्य मॉ लक्ष्मी कभी नहीं छोड़ेगी आपका साथ

कठिन परस्थिति में धैर्य यानि शांति सेलेना चाहिए काम

अक्सर अपने से बड़े-बूढ़ों को कहते सुना होगा कि कठिन से कठिन परस्थिति में धैर्य यानि शांति से काम लेना चाहिए।

आपको बता दें कि यह बातें सिर्फ कहने की नहीं हैं बल्कि हिंदू धर्म के शास्त्रों में कहा गया है कि इंसान को घर-परिवार में क्रोध नहीं करना चाहिए।

तो आइए आज आपको शास्त्रों में बताए गए ऐसे 7 कामों के बारे में बताते हैं, जिन पर अमल करेंगे तो महालक्ष्मी आपका साथ कभी नहीं छोड़ेंगी।

शास्त्रों को मानने वाले लोगों पर देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा रहती है। कहा जाता है कि ऐसे लोगों को धन संबंधी कामों में विशेष लाभ मिलता है और उनके घर में हमेशा खुशहाली बनी रहती है।

गरुड़ पुराण में देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए सात शुभ काम बताए गए हैं। यहां जानिए कौन से हैं वो काम-

धैर्य

किसी भी काम में स्थाई सफलता तभी मिलती है, जब अंतिम समय तक धैर्य बना कर रखते हैं। जब भी धैर्य छोड़कर जल्दबाजी की जाती है, असफल होने की संभावनाएं बढ़ने लगती हैं।

क्रोध न करें

क्रोध, व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता को नुकसान पहुंचाता है। क्रोधी व्यक्ति के जीवन और घर में हमेशा अशांति रहती है। जहां अशांति होती है, वहां दरिद्रता का वास होता है। लक्ष्मी कृपा चाहिए तो क्रोध को छोड़ देना चाहिए।

इंद्रियों

पांच ज्ञान इंद्रियां और पांच कर्म इंद्रियां (जिन इंद्रियों से हम काम करते हैं।) बताई गई हैं। इन्हें वश में रखना चाहिए। यदि इन पर हमने सही नियंत्रण रखा तो अलग-अलग समय पर अलग-अलग इंद्रियां हमें हमारी परेशानियों के लिए सही समाधान बता देती हैं।

पवित्रता

जो लोग मन और शरीर की पवित्रता बनाए रखते हैं, उन्हें लक्ष्मी की प्रसन्नता प्राप्त होती है। मन की पवित्रता अच्छे विचारों से होती है और शरीर की पवित्रता साफ-सफाई से रहने से होती है।

गरीबों की मदद

गरीब और जरुरतमंद लोगों के लिए दया का भाव होना भी जरूरी है। समय-समय पर ऐसे लोगों की अपनी सामर्थ्य के अनुसार मदद करते रहना चाहिए।

दिल दुखाने वाली बात नहीं बोलनी चाहिए

घर-परिवार हो या समाज, हमें सदैव ही मीठे वचनों यानी वाणी का उपयोग करना चाहिए। जाने-अनजाने कभी भी ऐसे शब्दों का उपयोग नहीं करें, जिनसे किसी के मन को ठेस पहुंचती है।

जलन का भाव न रखें

मित्रों और शुभचिंतकों के प्रति जलन का भाव नहीं रखना चाहिए। जो लोग दूसरों के प्रति जलन का भाव रखते हैं, उनसे महालक्ष्मी कभी भी प्रसन्न नहीं हो सकती हैं। सभी से प्रेम भाव रखना चाहिए।

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