उत्तर प्रदेशराष्ट्रीय

कंफर्टेबल के लिए खुशी को मन से न जाने देें : ईवी गिरीश

- शैलेंद्र गुप्ता शैली

फ़िरोज़ाबाद।(उत्तर प्रदेश) गांधी पार्क में आयोजित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा पांच दिवसीय शिविर के तीसरे दिन मुंबई से पधारे प्रोफेसर ई वी गिरीश भाई ने आपस में प्यार और स्नेह के मूल्य को बेहद सटीक भाषा और उदाहरण देकर बताया कि मानव जीवन को प्यार से सामने वाले को अपना बना सकता है ।मानव जीवन सभी चीजों में कंफर्टेबल चाहता है। जब कंफर्टेबल नहीं रहता है तो खुशी छिन जाती है ।अगर व्यक्ति को इच्छित बस्तु सुलभ नहीं हो पाए तो भी खुशी काफूर हो जाती है ।ऐसा क्यों। खुशी तो अर्जित करने की चीज़ है ।खुशी बांटने की चीज है ।इसे छीनता कौन है? हम खुद हैं ।

उन्होंने कहा कि जीवन का सिद्धांत यह कहता है कि हमें हमेशा अच्छा रहना है ।अच्छा सोचना है ।अच्छा सोचना ही माना खुशी को उत्पन्न करना है ।अपनी बात एक आतंकवादी भी मनवाता है, महात्मा गांधी ने भी अपनी बात मनवाई,श्रीकृष्ण ने भी अपनी बात मनवाई,लिकिन कर्तव्य और तरीका अलग था।मां भी अपनी बात अपने बेटे से मनवाना चाहती है ,किन्तु गुस्सा करके ।यह गलत है समझाने का तरीका भी होता है ।आप प्यार से समझाइए ,सलीके से समझाइए तो वह बात मान जाएगा।

आज मनुष्य अपने जीवन के सिद्धांत को विस्मृत करता जा रहा है ।सत्य से पीछे भाग रहा है। उससे अगर कोई भी प्रश्न करो तो एक खतरनाक सा जवाब मिलता है हमें पता नहीं। यह ठीक नहीं है ।आप मनुष्य हैं, विवेकी हैं, मन है, अंतरात्मा है तो यह कैसे कह सकते हैं कि हमें कुछ पता नहीं। यह कहकर हमें कुछ पता नहीं, यह जवाब विशुद्ध रूप से जिम्मेदारी से पलायन करना है ।सोचने की शक्ति से दूर भागना है।

उन्होंने कहा कि मैं पहले भी बता चुका हूं कि क्रोध एक अग्नि है, जो आपको बर्बाद कर देगी आप खुद को बर्बाद क्यों कर रहे हैं ।जब मनुष्य गुस्सा करता है तो शरीर में एक अलग तरीके का रसायनिक चेंज होता है। मेटाबोलिक परिवर्तन होता है ।गुस्सा करोगे तो बीमारी होने की संभावनाएं बढ़ जाएगी। हृदयघात की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।

प्रोफेसर गिरीश ने कहा कि बच्चा अगर टीवी देख रहा है पढ़ नहीं रहा है तो माताएं और पिता क्या करते हैं। पहले उसे समझाएंगे बेटा मान जाओ। पढ़ाई में मन लगाओ ।माताएं और अभिभावक आधा घंटा तक समझाते हैं अगर बालक नहीं मानता है तो यही माताएं दुर्गा बन जाती है। और बहुत तेजी से बच्चे को डांटकर कहती हैं की टीवी बंद करो और पढ़ाई करो। बच्चा पलट कर अपनी माता की भाव भंगिमा को पढ़ता है उस समय बालक के मन में एक अजीब सा डर का समावेश होता है ,जो बच्चे को आगे नहीं बढ़ने देगा ।बच्चे को प्यार से समझाइए ।प्यार की भाषा बोलिए तो उसके अंतर्मन में असुरक्षा की भावना पैदा होगी और आपके बताए अनुसार आपका बच्चा काम करेगा। आप क्रोध करके आप बच्चे को क्रोध का संस्कार दे रहे हैं।

अच्छे माता पिता को यह कतई हक नहीं है की बच्चे को दुखी रहने का संस्कार दें ।मन की शक्ति से उसके मन को जगाएं।लेकिन हम क्या करते हैं अगर आपका छोटू मंदिर में जलते हुए दीपक की तरफ हाथ बढ़ाता है तो आप उसे डांट कर खींच लेते हैं लेकिन अगर आप बहुत प्यार से उसका हाथ पकड़कर उस जलती हुई लौ के थोड़ा दूर ले कर जाएं तो उसे गर्माहट का एहसास होगा छोटू अगली बार उस जलते हुए दीपक को छूने का प्रयास नहीं करेगा ।यह हुआ माता पिता का अपने बच्चे के प्रति सकारात्मक प्यार का प्रयास।

प्रोफेसर गिरीश भाई ने दुख को लेकर चर्चा करते हुए कहा कि बेटे के एक्सीडेंट होने की खबर पर माता पिता दुखी हो जाते हैं।क्या आप बेटे का दर्द आप ले सकते हैं। क्या आपके दुखी होने से वह सही हो जाएगा। क्या बेटे के दर्द को आप अपने शरीर में ले सकते हैं ।आप दुखी न हो कर उसको ऐसा माहौल दे कि वह दर्द के एहसास को कम समझे। उस को समझाएं कि कोई बात नहीं, सब ठीक हो जाएगा।खुद दुखी होकर बच्चे की व्यथा को बढ़ाएं नहीं।

उन्होंने कहा कि जब हम किसी का भाग्य नहीं बना सकते ।हम किसी का दुर्भाग्य को हटा नहीं सकते तो दुखी क्यों होते हो। वास्तविकता यह है कि प्रॉब्लम हम खुद हैं ।समस्या खुद पैदा कर रहे हैं ।माता पिता को चाहिए कि वह अपने बच्चों में हिम्मत, उल्लास और खुशबू फैलाने का सकारात्मक संस्कार रोपित करने का अवसर दें ।उसमें निराशा के भाव फैलाने के शब्द न कहें ।सकारात्मक प्रयास से अपने मन की ताकत से आप अपने बच्चों को पावरफुल बना सकते हैं।

हम किसी का भाग्य नहीं बना सकते, किसी का भाग्य नहीं बदल सकते। मेरे जीवन में मेरे दुःख का कारण हम खुद हैं। जो नहीं संभव है उसके लिए दुखी क्यों । मुझे माताओं के रोने, दुखी होने से समस्या है। ब्रह्माकुमारी वह परिवर्तन करना चाहती है। जिससे आप दुखी न हो। जीवन का उद्देश्य सदा सुख, सदा शान्ति, सदा आनंद है। उन्होंने अपने बारे में बताया मैंने काफी स्टूडेंट्स को पढ़ाया है, फेसबुक का आपको आईडी और पासवर्ड भी दे दूंगा लेकिन उसमें आप ये डालकर पूछना क्या गिरीश भाई को कभी गुस्सा आया तो पूरे कॉन्फिडेन्स से कहता हूँ बड़े बड़े अक्षरों में जबाब आएगा नो। क्योंकि मैंने बिना गुस्से के अच्छे अच्छे स्टूडेंट्स को सीधा किया है। उनको सकारात्मक दिशा दी है । गुस्सा और दुःख ही हमारे जीवन में कई चिंताओं का कारण है ।इसलिये इससे दूर रहे, आप वो कुछ नहीं बदल सकते जो होने वाला है इसलिये अपने आप को बदलें।

कार्यक्रम में ब्रह्मकुमारी विश्वविद्यालय की संचालिका सरिता बहन, मेयर नूतन राठौर,उप नगर आयुक्त प्रमोद, प्रमुख उद्यमी देवीचरन अग्रवाल, शंकर गुप्ता,राज धाकरे, जीके शर्मा, शंकर गुप्ता, मंगल सिंह राठौर,वरिष्ठ पत्रकार शैलेंद्र गुप्ता शैली , पार्षद विजय शर्मा,राकेश गोयल संग सैकड़ो की संख्या में महिला पुरुष मौजूद थे।

Tags

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.