विचार

क्या वाकई शराब पीकर गाड़ी नहीं चलाती महिलाएं ?

क्या आपको लगता है की लड़कियां शराब पीकर गाड़ी नहीं चलाती ? अब आपको लगे या न लगे पर ये सोच है दिल्ली पुलिस की! जी हां, बिलकुल ठीक पढ़ा आपने कि ये सोच दिल्ली पुलिस की है |

क्या आपको लगता है की लड़कियां शराब पीकर गाड़ी नहीं चलाती ? अब आपको लगे या न लगे पर ये सोच है दिल्ली पुलिस की! जी हां, बिलकुल ठीक पढ़ा आपने कि ये सोच दिल्ली पुलिस की है |

दरअसल, दिल्ली पुलिस के आकड़ो के अनुसार वर्ष 2017 में एक भी महिला को शराब पीकर गाड़ी चलाने के जुर्म में चालान नहीं किया गया।

शायद ये जानकार भी आप हैरान हो जाएंगे कि इस वर्ष के भी ढाई महीने बीत चुके हैं, लेकिन सिर्फ एक महिला ड्राइवर को ही इस अपराध का दोषी पाया गया है। यही नहीं, अन्य ट्रैफिक अपराधों में भी महिलाओं का आंकड़ा बेहद कम है।

हालांकि सड़क दुर्घटनाओं में राजधानी दिल्ली में हुई कुल मौतों में 10 फीसदी महिलाएं थीं।

अगर इन आंकड़ों पर पुलिस का बयान सुना जाये तो यह भी कुछ कम दिलचस्प नहीं है

इस मामले में जाइंट सीपी ट्रैफिक गरिमा भटनागर का कहना है कि ” पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं ज्यादा सतर्कता के साथ ड्राइविंग करती हैं | पिछले साल पुलिस ने 1,67,867 ड्राइवरों का ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने के लिए चालान किया गया जिसमें मात्र 44 महिलाएं थीं। 1,39,471 ड्राइवरों को गाड़ी तेज चलाने के आरोप में पकड़ा गया जिसमें मात्र 514 महिलाएं थीं।

इस संदर्भ में दिल्ली पुलिस का कहना है पुरुष और महिला ड्राइवरों के बीच अनुपात में बहुत अंतर है। 71 पुरुष चालकों पर 1 महिला ड्राइवर है। यही वजह है कि पुरुष चालकों का ज्यादा चालान होता है। राजधानी में वर्ष 2017 में कुल 26 लाख चालान काटे गए जिसमें मात्र 600 महिला ड्राइवर शामिल थीं।

ट्रैफिक पुलिस के अध्ययन में भी इसी ट्रेंड का संकेत मिलता है। अध्ययन के मुताबिक दो फीसदी महिला ड्राइवर ही ऐक्सीडेंट में शामिल होती हैं। अध्ययन में दावा किया गया है राजधानी में तेज गति से गाड़ी चलाने के कारण सबसे ज्यादा मौतें हुईं हैं और महिला ड्राइवर आमतौर पर तय सीमा में ही चलती पाई गई हैं।

ट्रांसपोर्ट विभाग के आंकड़ों के मुताबिक आरटीओ के पास पंजीकृत कुल वीइकल में से मात्र 11 फीसदी ही महिलाओं के नाम हैं या उन्हें महिलाएं चलाती हैं।

पुलिस का कहना है कि एक दुखद पहलू यह है कि सड़क दुर्घटनाओं में राजधानी दिल्ली में हुई कुल मौतों में 10 फीसदी महिलाएं थीं जबकि कुल घायलों में 14 प्रतिशत महिलाएं थीं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि वे बिना हेलमेट के दो पहिया वाहनों से चलती हैं।

Summary
Review Date
Reviewed Item
क्या वाकई शराब पीकर गाड़ी नहीं चलाती महिलाएं ?
Author Rating
51star1star1star1star1star
Rajesh Minj PL Bhagat Parul Mathur sushil mishra
shailendra singhdev roshan gupta rohit bargah ramesh gupta
prabhat khilkho parul mathur new pankaj narendra yadav
manish sinha amos kido ashwarya chandrakar anuj akka
anil nirala anil agrawal daffodil public school
madhuri kaiwarta keshav prasad chauhan Tahira Begam Parshad ward 11 katghora krishi mandi
Tags

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.