बीमारियो के इलाज बाबाओ से नहीं अस्पताल जाकर कराएं : मिश्र

रायपुर:  कुछ लोग अंधविश्वास के कारण हमेशा शुभ-अशुभ के फेर में पड़े रहते हैं, लेकिन समाज में अभी भी कई मामलों में अठारहवीं सदी की मान्यताएं और कुरीतियां जड़ें जमाई हुई हैं। इसके कारण जादू, टोना, टोनही, बलि और बाल विवाह जैसी परंपराएं और अंधविश्वास आज भी वजूद में है। ये बातें अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने ग्राम डूमरतराई में रविवार को व्याख्यान में कही। 

उन्होंने आगे कहा कि, प्रतिवर्ष अनेक मासूम जिंदगियां तबाह हो रही है, पिछले कुछ माह में अनेक महिलाएं टोनही के चक्कर में मौत के घाट उतार दी गईं। जबकि तंत्र, मंत्र, झाड़-फूंक, भूत-प्रेत के वहम में दर्जनों से अधिक व्यक्तियों को प्रताडऩा सहनी पड़ी। ये सभ्य समाज के लिए बहुत शर्मनाक है और वर्तमान में वैज्ञानिक सोच को अपनाने की आवश्यकता है। 

डॉ. मिश्र ने कहा कि, प्राकृतिक आपदाएं हर गांव में आती है, मौसम परिवर्तन और संक्रामक बीमारियां भी गांव को चपेट में लेती है, वायरल बुखार, मलेरिया, दस्त जैसे संक्रमण भी सामूहिक रूप से अपने पैर पसारते है। ऐसे में ग्रामीण अंचल में लोग बैगा, गुनिया के परामर्श के अनुसार विभिन्न टोटकों, झाड़-फूंक के उपाय अपनाते हैं। जबकि हर बीमारी का इलाज न झाड़-फूंक हो सकता है न ताबीज से, प्राकृतिक आपदायें न ही तंत्र-मंत्र, बलि से ठीक हो सकती है। उन्होंने कहा कि, बीमारी के उपचार के लिए चिकित्सक स्वास्थ्य केंद्र, मेडिकल कॉलेज में इलाज करवाएं, प्रत्येक बीमारी और समस्या का कारण, उसका समाधान अलग अलग होता है, जिसे विचारपूर्ण तरीके से ढूंढा जा सकता है। यदि इस प्रकार इलाज करना संभव होता तो सरकार को अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, नहीं खोलने पड़ते, यह मरीजों के साथ धोखाधड़ी है।

ताबीज से नहीं सुधारा जा सकता रेडियो

डॉ मिश्र ने कहा आज अधिकांश गांव में लोगों के कोई न कोई वैज्ञानिक उपकरण है बिजली का बल्ब फ्यूज होने पर उसे झाड़-फूंक कर पुन: प्रकाश नहीं प्राप्त किया जा सकता, न ही मोटर सायकल, ट्रांजिस्टर बिगडऩे पर उसे ताबीज पहनाकर नहीं सुधारा जा सकता। रेडियो, मोटर सायकल, टीवी, ट्रेक्टर की तरह हमारा शरीर भी एक मशीन है, जिसमें बीमारी आने पर उसके विशेषज्ञ के पास ही जांच और उपचार होना चहिए।

अंधविश्वास के चलते अभी भी अनेक स्थानों पर यह माना जाता है कि हाथ खुजलाने से पैसा मिलता है, लक्ष्मी आती है वास्तव में खुजली त्वचा की बीमारी है जो एलर्जी होने से होती है। खुजली का पैसे से कोई संबंध नहीं है। यदि हाथ खुजलाने से ही धन-दौलत आती तो खुजली के सारे मरीज अमीर होते। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है, खुजली जैसी विभिन्न बीमारियों के मरीजों को अंधविश्वास में पडऩे की बजाय इलाज कराना चाहिए। 

डॉ. मिश्र ने उपस्थित ग्रामीणों और छात्राओं से विभिन्न सामाजिक कुरीतियों और अंधविश्वासों की चर्चा करते हुए कहा कि, बच्चों को भूत-प्रेत, जादू-टोने के नाम से नहीं डरायें क्योंकि इससे उनके मन में काल्पनिक डर बैठ जाता है। ये उनके मन में ताउम्र बसा होता है। बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, निडरता के किस्से कहानियां सुनानी चाहिए। जिनके मन में आत्मविश्वास और निर्भयता होती है, उन्हें न ही नजर लगती है और न कथित भूत-प्रेत बाधा लगती है। यदि व्यक्ति कड़ी मेहनत, पक्का इरादा कर काम करें तो कोई भी ग्रह उसके रास्ते में बाधा नहीं बनते।

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