यात्रा करने से पहले करें दुर्गा का कवच का करें पाठ, दूर होगा मन का भय

दुर्गा की रक्षा के लिए सदा तैनात रहती हैं और कवच का अर्थ है सुरक्षा घेरा

जब एक जगह से दूसरी जगह पर जाया जाता है तो उसे यात्रा कहा जाता है। यात्रा पूरी होगी या नहीं अथवा उसे लेकर मन में किसी भी तरह का भय बना रहता है तो दुर्गा कवच का पाठ करने के बाद घर से निकलें।

दुर्गा यानी जो दुर्ग की रक्षा के लिए सदा तैनात रहती हैं और कवच का अर्थ है सुरक्षा घेरा। अपने भक्त की रक्षा के लिए देवी दुर्गा स्वयं उसे सुरक्षा देती हैं।

यह शक्ति साधना व कृपा प्राप्ति का सबसे सरल माध्यम है। दुर्गा कवच मार्कंडेय पुराण का एक भाग है। इसमें इसके बहुत सारे लाभ बताए गए हैं-

यात्रा में कोई कोई दुख-तकलीफ नहीं आता।

कठिन एवं असाध्य रोगों का नाश होता है।

सांसारिक और आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं।

आयु लंबी होती है।

हर प्रॉब्लम का समाधान है कवच मंत्र का पाठ- ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै

दुर्गा कवच का पाठ न केवल आत्मिक तरीके से बल्कि साइकोलॉजिकल भी व्यक्ति के तन और मन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

प्राचीन भारतीय थेरेपी के अनुसार यदि लगातार किसी नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति के साथ सकारात्मक बातें की जाएं तो वह नेगेटिव सोच को छोड़ पॉजिटिव बातों को स्वीकार करने लगता है। थेरेपी में बताया गया है

जैसा भाव मन-मस्तिष्क में बन जाता है वैसा ही व्यक्ति का व्यक्तित्व हो जाता है। दुर्गा कवच में बताया गया है शरीर के बाहरी-आंतरिक अंगों की रक्षा नवदुर्गा मिलकर करती हैं। यह केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं है बल्कि साइंटिफिक हीलिंग टेकनीक है।

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