दो टूक (श्याम वेताल): सत्ता विरोधी लहर पर सवार होगा झीरम का जिन्न ?

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श्याम वेताल

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव इसी साल है और इस चुनाव के पहले कांग्रेस आक्रामक मुद्रा में दिखाई दे रही है वहीं सत्तारूढ़ भाजपा बचाव की भूमिका निभा रही है. वैसे तो कांग्रेस रोज नये नये मुद्दे उठा कर भाजपा के सामने मुश्किलें खड़ी कर रही है लेकिन कांग्रेस ने अपनी जनअधिकार यात्रा के समापन के मौके पर नंदेली (रायगढ़) में झीरम हत्याकांड का संवेदनशील विषय उठाया और इसे विधानसभा चुनाव में प्रमुख मुद्दे के तौर पर शामिल करने का एलान किया है.

कांग्रेस के नेताओं को सत्तारूढ़ दल की नीयत पर संदेह है, उनका कहना है कि बार-बार की मांग के बावजूद अभी तक झीरम कांड की सीबीआई जांच की घोषणा नहीं की गयी है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल का कहना था कि झीरम में शहीद हुए बड़े-बड़े कांग्रेसी नेताओं की मौत से किसे लाभ पहुंचा है जिसे लाभ पहुंचा है वही हत्यारा है.

जहां तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के आरोप का प्रश्न है, वे पहले भी राज्य सरकार पर यह आरोप लगा चुके हैं कि मई 2013 में हुए झीरम हमले के पहले सरकार की ओर से किसी व्यक्ति ने माओवादियों को करोड़ों की रकम भेजवाई थी और पुलिस को इस हमले की पहले से जानकारी थी.

झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर नक्सली हमला मई 2013 में हुआ था और उसके 6 महीने बाद ही राज्य विधानसभा के चुनाव हुए थे लेकिन उस समय पार्टी पूरी दबंगई से न सीबीआई जांच की मांग कर पायी और न चुनाव में प्रचार के दौरान मतदाताओं को यह बता पायी कि इस हमले के पीछे राज्य सरकार का हाथ था.

इस बार कांग्रेस को ऐसा महसूस हो रहा है कि झीरम मामला फिर उठाया जाय तो राज्य के मतदाता पार्टी के पक्ष में वोट करेंगे. शायद इसीलिए इस मुद्दे को घोषणा पत्र में शामिल करने की बात की गयी है.

वैसे, देखा जाए तो कांग्रेस का यह आइडिया बुरा नहीं है. यह मुद्दा इस बार काम कर सकता है. ऐसा इसलिए भी संभव है क्योंकि इस मुद्दे को सत्ता विरोधी लहर का सहारा मिल सकता है. इसके अलावा कांग्रेस जनों की मौजूदा मेहनत भी इस मुद्दे को चमकदार बनाने में सफल होगी. मंत्रियों पर भ्रष्टाचार और नौकरशाही पर निरंकुशता का आरोप कांग्रेस लगाती ही रही है, चुनाव में ये आरोप भी रंग दिखाएंगे.

कांग्रेस की कमजोरी सिर्फ इतनी है कि उसके पास कार्यकर्ताओं का नेटवर्क भाजपा जैसा नहीं है. भाजपा अपनी इसी मजबूती का लाभ उठा सकती है वरना अन्य सभी बातें भाजपा को दुर्बल दिखा रही है. भाजपा का कहना है कि विगत 15 वर्षों में उसने राज्य का जो विकास किया है उसके आधार पर वह मतदाताओं के बीच जाएगी, बिलकुल सही बात है लेकिन कांग्रेस तो कह रही है कि विकास करना सत्तारुढ़ दल का मुख्य दायित्व है और जनता को खुश रखना नैतिक दायित्व है जिसमें सत्तारूढ़ दल विफल रहा है. राज्य की जनता आज शासन-प्रशासन से खुश नहीं है.

उधर, मुख्यमंत्री समेत सभी भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य में सत्ता विरोधी लहर नाम की कोई चीज़ ही नही है, लेकिन भाजपा के लोग अंदर ही अंदर ‘एंटी इन्कम्बेंसी’ को ही अपना सबसे बड़ा शत्रु मान रहे हैं.</>

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