छत्तीसगढ़

डॉक्टर अब ओपीडी पर्ची में नहीं लगा सकेंगे अपने नाम की सील

भरत ठाकुर

बिलासपुर : जन औषधि दवा का चलन बढ़ाने देने और मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर भेजने वाले चिकित्सकों पर लगाम लगाने जिला अस्पताल प्रबंधन ने नया निर्देश जारी किया है। इसके अनुसार डॉक्टर ओपीडी पर्ची पर अपने नाम का सील नहीं लगा सकेंगे। दवाओं को प्रमाणित करने सिर्फ हस्ताक्षर करना होगा। इससे प्रबंधन नजर रख सकेगा कि कौन से डॉक्टर किस तरह की दवा ज्यादा लिख रहे हैं।

ये हैं निर्देश
राज्य शासन के सख्त निर्देश हैं कि मरीजों को ज्यादा से ज्यादा जेनरिक दवाएं लिखी जाएं, जरूरत पड़ने पर ही ब्रांडेड दवा लिखनी है। सरकारी अस्पतालों इसका पालन नहीं हो रहा है। डॉक्टर निजी मेडिकल स्टोर से मिलने वाले कमीशन के चक्कर में ज्यादा से ज्यादा ब्रांडेड दवा लिख रहे हैं। साथ ही ओपीडी पर्ची में अपने नाम का सील भी लगा रहे हैं । वे जानकारी भी दे रहे हैं कि दवा किस मेडिकल स्टोर में मिलेगी। मेडिकल स्टोर में फार्मासिस्ट पर्ची देखकर समझ जाता है कि किस डॉक्टर ने भेजा है। इस आधार पर कमीशन मिलता है। यह काम बड़े पैमाने पर चल रहा है। इसके कारण सस्ती जेनरिक दवाओं का फायदा मरीजों को नहीं मिल रहा है। इसको देखते हुए जिला अस्पताल प्रबंधन ने व्यवस्था में परिवर्तन किया है।

आसपास एक दर्जन से ज्यादा दुकानें
जिला अस्पताल के 100 मीटर के दायरे में लगभग एक दर्जन से ज्यादा मेडिकल स्टोर हैं। इन मेडिकल स्टोर की किसी न किसी डॉक्टर से सेटिंग है। वे अपने मरीजों को दवाओं के लिए इन मेडिकल स्टोर में भेजते हैं।

ग्रामीण क्षेत्र में फरमान बेअसर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और स्वास्थ्य केंद्रों का इस मामले में सबसे बुरा हाल है। सीएमओ डॉ. बीबी बोर्डे ने साफ कहा था कि ग्रामीण क्षेत्र के डॉक्टर सीधे मरीजों को मेडिकल स्टोर भेज देते हैं। ऐसे करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इस फरमान का असर नहीं हुआ है। वहां भी जेनरिक दवा छोड़कर ब्रांडेड दवा लिखी जा रही है।

सिम्स में बड़े पैमाने में कमीशनखोरी
संभाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज सिम्स में दवाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी का खेल चलता है। यह 100 से ज्यादा जूनियर डॉक्टर सेवा दे रहे हैं। आपातकालीन का संचालन इन्हीं के हाथों से होता है। ये डॉक्टर कमीशन के चक्कर मरीजों को निःशुल्क जेनरिक दवा उपलब्ध न कराते हुए ब्रांडेड दवा लिखते हैं। इस पर रोक लगाने यह निर्णय लिया गया है।

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