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डॉक्टरों ने की सिद्धू की बोलती बंद, जानिए क्या है वजह

चंडीगढ़।

अपने भाषण की खास अौर बेबाक शैली के लिए मशहूर पंजाब केे स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है। डॉक्टराें ने सिद्धू की आवाज को खतरा बताया है। राज्य के कई जिले में कांग्रेस का चुनाव प्रचार करते-करते अपनी आवाज खोने की कगार पर पहुंच गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब डॉक्टरों ने उन्हें पांच दिन कंप्लीट रेस्ट की सलाह दी है। बताया जाता है कि डॉक्टरों ने कहा है कि अब यदि अधिक बोला तो उनकी आवाज जा सकती है।

डॉक्टरों ने पांच दिनों तक पूरे आराम और पूरी तरह चुप रहने की सलाह दी

वीरवार को एक आधिकारिक प्रवक्ता ने यह खुलासा किया। जानकारी के अनुसार उनके खून के कई परीक्षण किए गए हैं और नतीजों का गंभीरता पूर्वक मूल्यांकन किया जा रहा है। सिद्धू संपूर्ण जांच और स्वास्थ्य रिकवरी के लिए एक अज्ञात स्थान पर चले गए हैं। उन्हें सांस लेने के अभ्यास करवाया जा रहा है। साथ ही, फिजियोथेरेपी के साथ विशेष दवाएं दी जा रही हैं।

सिद्धू ने 17 दिनों में 70 से अधिक जनसभाओं को किया संबोधित

बता दें कि सिद्धू पिछले दिनों 17 दिवसीय चुनाव अभियान पर थे। विशेष तौर पर तेलंगाना और राजस्थान में उन्होंने कांग्रेस के समर्थन में कई सभाएं की थीं। उन्होंने 70 से अधिक सार्वजनिक बैठकों में लोगों को संबोधित किया था। उन्होंने मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस के लिए चुनावी सभाआें को संबोधित किया। इस दौरान लगातार भाषण देने के कारण उनकी वोकल कॉर्ड्स को काफी नुकसान पहुंचा। मेडिकल हेल्प लेने पर डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि मामला बहुत गंभीर है। वह अपनी आवाज खोने के कगार पर थे। डॉक्टरों ने सिद्धू को तीन से पांच दिन तक पूरा आराम करने का सुझाव दिया है।

प्रवक्ता ने बताया कि लगातार हेलीकॉप्टर और विमान यात्रा करने से उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा है। वह पहले ही एंबोलिज्म (धमनी में खून का थक्का जमना या हवा का बुलबुला बनना) के लिए उपचार करवा रहे थे। उन्हें कुछ साल पहले अत्यधिक हवाई यात्रा करने के कारण डीप वेन थ्रोबोसिस (डीवीटी) का सामना करना पड़ा था।

डॉक्टरों ने सिद्धू से कहा- पांच दिन तक कुछ ने बोलें

डॉक्टरों के अनुसार, सिद्धू को लिरिंगजाइटिस (गले की बीमारी, वोकल कार्ट) नामक बीमारी हो गई है। इसे लेकर उन्हें पांच दिनों तक एकदम चुप रहने की सलाह डाक्टरों ने दी है। बता दें कि दो सप्ताह से पंजाब व भारत से लेकर पाकिस्तान तक में अपनी तेज तर्रार भाषण शैली तथा अपने सियासी विरोधियों पर कमेंट करने को लेकर सिद्धू सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र बिंदु बने हुए हैं।

श्री करतारपुर साहिब कोरीडोर के निर्माण को लेकर पाकिस्तान में नींव का पत्थर रखने को लेकरक आयोजित समारोह में शिरकत करके लौटने के बाद सिद्धू मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर कमेंट करके बुरे फंस गए हैं। कांग्रेस ने उन्हें पाकिस्तान से लौटने के बाद तेलंगाना व राजस्थान में चुनाव प्रचार के लिए भेज दिया था। तेलंगाना में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ उन्होंने बयान दे दिया कि उनके कैैप्टन तो राहुल गांधी हैं, अमरिंदर नहीं। इसके बाद सिद्धू कांग्रेसियों के निशाने पर चल रहे हैं।

राहुल गांधी दरबार से सिद्धू को इस मामले में गलत बयानबाजी के लिए फटकार लगाए जाने के बाद सिद्धू के तेवर भी नरम पड़े और उन्होंने बयान जारी किया कि कैप्टन उनके पिता समान हैं और वह उनको मना लेंगे। मामला अभी शांत नहीं हुआ है। कांग्रेसी मंत्री सिद्धू के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। इस सियासी उठापटक के बीच चुनाव प्रचार में लगातार सिद्धू की हुई 70 जनसभाओं में भाषणबाजी ने उनका गला खराब कर दिया है।

इस कारण होती है यह बीमारी

चिकित्सा विशेषज्ञ इसे इस रूप में देखते हैं जब शरीर उत्साह से भरा हो और दिमाग तथा शरीर लगातार तेज बोलने को लेकर प्रेरित कर रहा हो और गला आपका साथ न दे तो इसे लिरिंगजाइटिस की बीमारी कहते हैं। यानी शरीब व दिमाग नहीं थका लेकिन गला थक गया। दोनों से बीच तालमेल खराब होने से यह बीमारी होती है।

केजरीवाल की बोलती भी हुई थी बंद, कराना पड़ा था जीभ का ऑपरेशन

चुनावी प्रचार व ज्यादा बोलने के कारण आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी इस तरह की समस्या से ग्रस्त हो गए थे। कुछ समय पहले बेंगलूरू के एक अस्पताल में केजरीवाल की लंबी जीभ का आपरेशन किया गया था। डाक्टरों ने बताया था कि उनकी जीभ लंबी हो गई है। उसकी वजह से उन्हें बोलने में परेशान होने के साथ-साथ संक्रमण की बीमारी हो रही है। केजरीवाल अपनी तेज तर्रार शैली के चलते विरोधियों के निशाने पर रहते हैं।

कम से कम पांच दिन का कंप्लीट रेस्ट देना पड़ता हैःविशेषज्ञ

पंजाब के प्रसिद्ध गले के डाक्टर सुरिंदर शारदा कहते हैं एेसे मामलों में गले में ज्यादा बोलने के कारण संक्रमण हो जाता है। एंटी एलर्जिक दवाइयों के साथ स्टीम लेकर कम से कम पांच दिनों तक चुप रहकर गले को रेस्ट देना पड़ता है। फिर वह दोबारा बोलने के लिए तैयार होता है। अगर मरीज एेसा नहीं करता है तो आवाज जाने का भी खतरा बढ़ जाता है। आयुर्वेद के विशेषज्ञ डा.संजीव सूद के अनुसार यह बीमारी ज्यादा तेज बोलने वालों को होती है। आयुर्वेद में टीचर्स नोड (स्वर भेद) कहते हैं। कचनार-गुुगल से बनी दावाइयां इसका बेहतरीन इलाज है।

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