मध्यस्थता के प्रभावी प्रयोग पर संभाग स्तरीय एक दिवसीय कार्यषाला सम्पन्न

अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के रजिस्ट्रार दीपक कुमार तिवारी के मुख्य आतिथ्य में आज यहां राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय अम्बिकापुर के सभाकक्ष में मध्यस्थता रिफरल जजो की भूमिका तथा इसे प्रभावी बनाने पर संभाग स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि तिवारी ने माँ सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर इस कार्यशाला का शुभारंभ किया।

छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी बिलासपुर के निर्देशानुसार आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला के मुख्य अतिथि तिवारी ने कहा कि जनसामान्य को मध्यस्थता का सहारा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आम जनता द्वारा मध्यस्थता का उपयोग करने से न्यायालयों में प्रकरणों की संख्या में कमी आएगी तथा पक्षकारों को शीघ्र और सस्ता न्याय भी मिल सकेगा। तिवारी ने रिफरल जजो की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए मध्यस्थता को और प्रभावी बनाने के उपाय भी बताए। सरगुजा जिला के जिला एवं सत्र न्यायाधीशा बी.पी. वर्मा ने कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य अतिथि तिवारी तथा विषिष्ट अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी बिलासपुर के अतिरिक्त निदेषक संतोष कुमार तिवारी का स्वागत किया। इस कार्यषाला में सरगुजा संभाग के सरगुजा, कोरिया, जषपुर, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे।

ज्ञातव्य है कि मध्यस्थता एक वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रम है जिसमें पक्षकार किसी तीसरे व्यक्ति के हस्तक्षेप के माध्यम से तथा न्यायालय का सहारा लिए बिना अपने विवादांे का निपटान करवाते हैं। यह एक ऐसी विधि है जिसमें विवाद किसी नामित व्यक्ति के सामने रखा जाता है जो दोनों पक्षों को सुनने के पष्चात और भी न्यायिक तरीके से मसले का निर्णय करता है। इस विधि के द्वारा समाधानकर्ता की सहायता से पक्षकारों द्वारा विवादों के सौहार्दपूर्ण निपटारा किया जाता है। मध्यस्थ विधि न्यायालय में मुकदमे की तुलना में कम महंगे होते हैं तथा यह अत्यधिक सरल और त्वरित होते हैं जिससे दोनों पक्षकार समय के अपव्यय से बचते हैं। मध्यस्थ प्रक्रिया में विवाद का प्रचार नहीं होता तथा गोपनीयता सुनिष्चित होती है। अवार्ड, निर्णय सामान्यतः अंतिम होता है, क्योंकि अपील केवल कुछ मामलों में ही अनुमत की जाती है।

इस विधि के द्वारा पक्षकारों के अधिकारों एवं कर्तव्यों, व्यवसाय प्रयोगों,विवाद को परिस्थितियों और पक्षकारों के बीच पूर्ववर्ती कारोबारी पद्धतियों पर विचार किया जाता है। जब तक पक्षकारों द्वारा अन्यथा सहमति न हो, उसी विवाद के संबंध में किसी पंचाट या न्यायिक कार्रवाई में किसी एक पक्ष के मध्यस्थ या प्रतिनिधि के रूप में कार्य नहीं किया जाता है।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी बिलासपुर के अपर संचालक संतोष कुमार तिवारी, सरगुजा जिले के जिला एवं सत्र न्यायाधीष बी.पी. वर्मा, कोरिया जिले के विजय कुमार एक्का, सूरजपुर जिले की डी.एल.कटकवार, जषपुर जिले के रजनीष श्रीवास्तव, बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के अशोक कुमार लुनिया सहित अन्य न्यायाधीश उपस्थित थे।

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