‘आप’ की डोर स्टेप डिलीवरी सेवा, पहले दिन 21 हजार कॉल

पहले दिन सिर्फ 369 के घर पर ही पहुंच पाए मोबाइल असिस्टेंट

नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने राजधानी में सोमवार को डोर स्टेप डिलीवरी सेवा का श्रीगणेश किया। 40 सरकारी सेवाओं के लिए पहले दिन कॉल सेंटर के नंबर (1076) पर 21 हजार लोगों ने कॉल कीं। पर उनमें से सिर्फ 369 के घर ही मोबाइल असिस्टेंट पहुंचे।

मतलब पहले दिन महज 1.75 फीसदी लोगों की इस सेवा के जरिए बात बनी। वहीं, कई लोगों ने 1076 न मिलने की शिकायत की। हालांकि, सरकार ने कहा है कि आॅपरेटरों की संख्या दोगुनी की जाएगी, जबकि टेलीफोन लाइनें भी बढ़ाई जाएंगी। सरकार का दावा है कि यह दुनिया में ऐसी पहली सेवा है।

क्या है डोरस्टेप डिलीवरी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्लीवाले अब कई सरकारी काम इस सेवा के जरिए घर बैठे करा सकेंगे। उन्हें बस 1076 नंबर पर फोन मिलाना होगा, जिसके बाद एक मोबाइल असिस्टेंट उन लोगों के यहां आएगा।

उसके आने से पहले जरूरी दस्तावेजों के बारे में बताया जाएगा। सुबह आठ से रात 10 बजे के बीच असिस्टेंट को घर बुलाया जा सकता है। वह आकर दस्तावेजों के फोटो खींचेगा और बाकी प्रक्रिया पूरी करेगा। तय समय सीमा के भीतर काम निपटेगा।

बाद में आपका सर्टिफिकेट या रसीद घर पर पोस्ट कर दी जाएगी या मोबाइल असिस्टेंट के जरिए भी उसे भेजा जा सकता है। पूरी प्रक्रिया का सेवा शुल्क 50 रुपए है। यह आइडिया सीएम के तकनीकी सलाहकार गोपाल मोहन का है। वह आईआईटी से पढ़े हैं।

सोमवार को कॉल सेंटर से डोरस्टेप डिलीवरी के लिए कुल 1286 कॉल्स के जवाब दिए गए। पर कई लोगों ने शिकायत की कि 1076 मिल ही नहीं रहा है। जांच में मालूम पड़ा कि योजना जमीनी स्तर पर लागू कराने वाली कंपनी ने सात विभागों की 40 सरकारी सेवाओं के लिए जो कॉल सेंटर शुरू किया, उसमें केवल 40 ऑपरेटर हैं।

वहीं, सुपरवाइजर की संख्या इसमें 11 और मोबाइल असिस्टेंट की संख्या इसमें 66 है, लिहाजा अधिक लोगों की कॉल कनेक्ट न हो सकी या उसके जवाब न दिए जा सके।

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