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दो टूक (श्याम वेताल) : चुनाव घोषणापत्र का इंतजार – उत्तम शिक्षा, न रहे ‘स्वास्थ्य’ बीमार, करें प्रबंध ऐसा, मिले सभी को रोजगार

     श्याम वेताल

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए मतदान की तारीख नजदीक आ चुकी है. 12 नवम्बर को 18 सीटों के लिए मतदान होना है. इस पहले चरण के लिए नामांकन भी भरे जा चुके हैं. इन 18 सीटों में राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का निर्वाचन क्षेत्र राजनंदगांव भी शामिल है. सत्तारूढ़ भाजपा का मुख्य मुकाबला कांग्रेस पार्टी से है. दोनों पक्षों की ओर से जोरदार तैयारियां शुरू हो चुकी है. लेकिन पहले चरण के नामांकन के अंतिम दिन तक दोनों में से किसी भी दल ने अपना घोषणापत्र जारी नहीं किया है.

जहां तक भाजपा का प्रश्न है पार्टी के किसी भी नेता ने अभी तक अपने भाषणों में इस बात का जिक्र नहीं किया है कि जीत कर आने के बाद अगले 5 साल तक वह राज्यवासियों के लिए क्या करेंगे. भाजपा नेता अपने भाषणों में सिर्फ यही बता रहे हैं कि पिछले 15 सालों में उन्होंने क्या किया. ‘विकास किया’, ‘विकास किया’ के ढोल पीटते जा रहे हैं. कांग्रेस ने 60 सालों में कुछ नहीं किया यह बताया जा रहा है.

मतदाता का सवाल है कि विकास आपने किया अच्छी बात है लेकिन आगे क्या करेंगे. विकास तो अनिवार्य है जो कुर्सी पर रहेगा उसे करना ही पड़ेगा. लेकिन छत्तीसगढ़ का युवा वर्ग आज भी चिंतित है कि उसे अच्छी पढ़ाई और अच्छी नौकरी के लिए आज भी दूसरे प्रदेशों का ही रुख करना पड़ रहा है. भाजपा ने बेरोजगारी दूर करने के लिए अभी तक ऐसा कुछ नहीं किया कि जिस पर वह गर्व कर सकें. इसी तरह शिक्षा के क्षेत्र में भी यह राज्य फिसड्डी ही साबित हुआ है. प्राइमरी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक छत्तीसगढ़ निचली पायदान पर है. राज्य के आधे से अधिक स्कूलों की इमारतें जर्जर है.

लड़कियों के स्कूलों में साफ सफाई नहीं है. अभी हाल ही में दिल्ली की विधायक अलका लांबा महासमुंद के एक स्कूल में गई थी. उन्होंने वहां की स्थिति का एक वीडियो सोशल मीडिया पर डाला था. उसी स्कूल की लड़कियों ने अलका लांबा को पूरी इमारत दिखाई. सच में, स्कूल की खस्ता हालत देखकर कोई भी हैरान हो सकता है. अलका लांबा ने वहां के छात्र-छात्राओं को दिल्ली आने का न्योता दिया और कहां – आइये, दिल्ली के सरकारी स्कूलों को देखिए. स्वास्थ्य के क्षेत्र को देखें तो वहां भी सरकारी अस्पतालों को ग्रहण लगा हुआ है. कई शहरों, कस्बों के अस्पताल सिर्फ शोभा की वस्तु बने हुए हैं, डॉक्टरों की नियुक्ति तक नहीं हुई है, सिर्फ राजधानी में अस्पताल की बेहतर व्यवस्था कर देने से पूरे राज्यवासियों की बीमारियां ठीक नहीं हो सकती. लेकिन सरकार में बैठे लोगों को लगता है चारो ओर हरा भरा ही है.

बहरहाल, भाजपा को जीत कर आने के बाद बेरोजगारी दूर करने के लिए युद्ध स्तरीय प्रयास करने होंगे और शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत काम करना होगा. पार्टी को इन दोनों क्षेत्रों में यह मानकर चलना होगा कि छत्तीसगढ़ शून्य पर है और उसे 100 तक पहुंचाना है इसका आश्वासन घोषणा पत्र में करना होगा.

कांग्रेस की बात करें तो पिछले हफ्ते पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने रायपुर के किसान रैली को संबोधित करते हुए कुछ वायदे किए हैं जो उनके घोषणापत्र का हिस्सा बनेंगे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस यदि सत्ता में आती है तो 10 दिन के अंदर किसानों के कर्ज माफ कर दिए जाएंगे. इसके अलावा हर जिले में फूड प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जाएंगे जिससे बड़ी संख्या में बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा. कांग्रेस की सरकार आने पर इलाज सस्ता होगा. सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलेगी. यदि किसी किसान की जमीन का अधिग्रहण होता है तो उसे उस जमीन का मार्केट रेट से चार गुना मुआवजा मिलेगा.

अतः राहुल गांधी की ये घोषणाएं कांग्रेस के घोषणापत्र में जरूर रहेंगी, यह तय है. निसंदेह घोषणाएं लुभावनी है और इन पर मतदाता मोहित हो सकता है.

बहरहाल, चुनावी घोषणाएं सिर्फ हवाबाजी ना बनें इसलिए पार्टी को घोषणा पत्र जारी करना होता है और सत्तारूढ़ दल इस घोषणाओं को पूरा कराने के लिए बाध्य होता है.

अब चूंकि यह विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए दोहरी परीक्षा है. पहली तो यह कि उसे सत्ता विरोधी लहर का सामना करते हुए बहुमत के आंकड़े को छूना है और दूसरी यह कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा दिए गए लक्ष्य 65 को प्राप्त करना है. दूसरी परीक्षा बहुत कठिन है, कांग्रेस ने इस बार बड़े-बड़े गति अवरोधक खड़े कर रखें हैं.

 

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