छत्तीसगढ़

किसानों की आमदनी दोगुना करने में वनौषधियों की खेती और वनोपजों का होगा महत्वपूर्ण योगदान: CM

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के नवीन प्रशासनिक भवन का भूमिपूजन

रायपुर : मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि किसानों की आमदनी दोगुना करने में वनौषधियों की खेती और वनोपजों का महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। मुख्यमंत्री आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा औषधीय सुगंधित फसलें एवं अकाष्ठीय वनोपज के माध्यम से उद्यमिता विकास’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वनौषधियों की खेती और वनोपजों के उत्पादन को बढ़ावा देने तथा किसानों और वनवासियों को इससे जोड़ने की जरुरत है।

इस कार्य में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, कृषि महाविद्यालयों, कृषि विज्ञान केन्द्रों, कृषि वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों तथा कृषि विभाग के मैदानी अमले की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। डॉ. सिंह ने दीप प्रज्जवलित करके कार्यशाला का शुभारम्भ किया। कार्यशाला स्वामी विवेकानंद सभागार, कृषि महाविद्यालय, रायपुर में आयोजित की गई। उन्होंने इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित स्मारिका का विमोचन किया। इस राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग और लघु उद्योग भारती छत्तीसगढ़ के सहयोग से किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज दुनिया में वनौषधियों का व्यापार लगभग 20 प्रतिशत वृद्धि दर के साथ बढ़ रहा है।

छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा और जैवविविधता के कारण इस में बड़ी भागीदारी हमारे प्रदेश की हो सकती है।
संसदीय सचिव तोखन साहू, छत्तीसगढ़ राज्य वनौषधि एवं पादप बोर्ड के अध्यक्ष रामप्रताप सिंहए मुख्या सचिव अजय सिंह, अपर मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त सुनील कुमार कुजूर तथा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के.पाटील इस अवसर पर उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने इसके पहले कैम्पा मद से निर्मित औषधीय एवं सुगंधित पौधे तथा अकाष्ठीय वनोपज उत्कृष्टता केन्द्र का लोकार्पण, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के नवीन प्रशासनिक भवन का भूमिपूजन और स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय के दो नवनिर्मित छात्रावास भवनों का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसानों और वनवासियों को वनौषधियों की खेती और वनोपजों के बेहतर प्रसंस्करण के बारे में समझाया जाए, प्रत्यक्ष दिखाया जाए और प्रशिक्षित किया जाए, तो वे इसे जरुर अपनाएंगे। उन्होंने औषधीय एवं सुगंधित पौधे तथा अकाष्ठीय वनोपज उत्कृष्टता केन्द्र का उल्लेख करते हुए कहा कि इस केन्द्र में औषधीय उत्पादों और वनोपजों के प्रसंस्करण उपकरणों की स्थायी प्रदर्शनी लगायी है।

इसका किसानों को प्रशिक्षित करने में उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने हमर छत्तीसगढ़ योजना के अंतर्गत राजधानी रायपुर और नया रायपुर के अध्ययन भ्रमण पर आने वाले पंचायत प्रतिनिधियों को इस उत्कृष्टता केन्द्र का भ्रमण कराने और आधुनिक यंत्रों के बारे जानकारी देने का सुझाव दिया। इस केन्द्र में चार, चिरौंजी, इमली, कोदो-कुटकी, काजू सहित विभिन्न उपजों के प्रसंस्करण उपकरणों का जीवंत प्रदर्शन किया गया है।

डॉ. सिंह ने कहा कि इससे प्रतिनिधियों को यह जानकारी मिलेगी कि वनौषधियों और वनोपजों के प्रसंस्करण के लिए आधुनिक उपकरण बाजार में अनुदान पर उपलब्ध हैं। उन्हें उपकरणों के उपयोग के बारे में भी बताया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वज हजारों वर्षों से जैविक खेती करते आये हैं। हमने रासायनिक उर्वरकों का प्रचुरता से उपयोग कर खेती को प्रदूषित कर दिया है। आज कृषि उपजों में हानिकारक रासायनिक तत्वों की उपस्थिति से हृदय रोग, कैंसर और मधुमेह जैसे रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ्य बनाये रखने के लिए फिर से जैविक खेती की ओर लौटना होगा।

उन्होंने प्रदेश में जैविक खेती का रकबा एक सौ एकड़ से बढ़कर 14 हजार एकड़ होने पर प्रसन्नता प्रकट की। उन्होंने कहा कि युवाओं का रुझान कृषि की ओर बढ़ रहा है, इस वर्ष के बजट में छह नए कृषि महाविद्यालय प्रारंभ करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कार्यशाला में गुंडाधूर कृषि महाविद्यालय कांकेर के विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल, ट्राफी और प्रमाण पत्र प्रदान करके सम्मानित किया। इन विद्यार्थियों ने रांची में आयोजित कृषि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्पर्धा में फोक बैंड की प्रस्तुति देकर गोल्ड मैडल जीता था।

इस दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के आयोजन का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ राज्य में उपलब्ध प्रचुर वन संपदा, सुगंधित फसलों एवं औषधीय एवं अकाष्ठीय वनोपज के माध्यम से उद्यमिता विकास को बढ़ावा देना है। इसके लिए कृषकों एवं छोटे उद्यमियों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन एवं सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराना और उन्हें उद्यमिता विकास के लिए प्रेरित एवं प्रोत्साहित करना है।

इस दो दिवसीय कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिप्राप्त संस्थानों जैसे केन्द्रीय औषधीय एवं सुगंध पौध संस्थान लखनऊ, भारतीय वन प्रबंध संस्थान भोपाल, प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान रांची, वन अनुसंधान संस्थान देहरादून, भारतीय समवेत औषध संस्थान जम्मू, सुगंध एवं सुरस विकास केन्द्र कन्नौज आदि के वैज्ञानिक तथा विशेषज्ञ, उद्योगपति, निर्माता और व्यापारी , किसान विश्वविद्यालय के शिक्षक तथा विद्यार्थी इस अवसर पर उपस्थित थे। डॉ सिंह ने सुगंधित फसलों औषधीय एवं अकाष्ठीय वनोपज के माध्यम से उद्यमिता विकास पर केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

Summary
Review Date
Reviewed Item
किसानों की आमदनी दोगुना करने में वनौषधियों की खेती और वनोपजों का होगा महत्वपूर्ण योगदान: CM
Author Rating
51star1star1star1star1star
Tags

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.