छत्तीसगढ़राज्य

डॉ. पाटिल बोले- कृषि सेवा केन्द्रों को सूचना केन्द्र के रूप में विकसित किया जाएगा

किसानों को कौशल विकास प्रशिक्षण भी देंगे कृषि सेवा केन्द्र

रायपुर: छत्तीसगढ़ के किसानों की खेती-किसानी संबंधी आवश्यकताओं एवं समस्याओं को समझने और उनके निराकरण के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में खाद तथा दवा विक्रय करने वाले सभी 748 कृषि सेवा केन्द्रों को कृषि सूचना केन्द्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही इन केन्द्रों के माध्यम से किसानों के लिए कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। ये कृषि सेवा केन्द्र इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित उत्पादों का विक्रय भी करेंगे।

इस आशय की घोषणा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटील ने कल यहां छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए कृषि सेवा केन्द्र के संचालकों को संबोधित करते हुए की। डॉ. पाटील ने कृषि सेवा केन्द्र संचालकों से आव्हान किया कि वे कृषि विश्वविद्यालय और राज्य शासन के साथ आवश्यक सहयोग करें और सबका साथ सबका विकास की अवधारणा को सफल बनाएं। कृषि महाविद्यालय रायपुर के सभागार में कृषि विस्तार सेवाएं डिप्लोमा पाठ्यक्रम (देसी) के तहत अध्ययनरत कृषि सेवा केन्द्र संचालकों के साथ एक दिवसीय परिचर्चा का आयोजन किया गया।

कुलपति डॉ. पाटील ने कृषि सेवा केन्द्र संचालकों को संबांधित करते हुए कहा कि दो वर्ष पहले जब विश्वविद्यालय द्वारा कृषि सेवा केन्द्र संचालकों के लिए यह एकवर्षीय पाठ्यक्रम शुरू किया गया तभी से यह विचार चल रहा था कि आप लोगों के जमीनी ज्ञान और व्यवहारिक अनुभव का लाभ खेती एवं किसानों के विकास के लिए किस तरह प्राप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि आप लोग किसानों, कृषि विश्वविद्यालय तथा राज्य सरकार के बीच की कड़ी बन सकते हैं। कृषि सेवा केन्द्र संचालकों की किसानों तक अच्छी पहुंच होती है और किसानों को आप पर काफी भरोसा भी हैं।

किसान सबसे पहले अपनी समस्या लेकर आपके पास आते हैं। फसलों पर कीट या बीमारियों के प्रकोप की जानकारी सबसे पहले आप तक पहुंचती है और उसके बाद कृषि विभाग तक। इसलिए कृषि सेवा केन्द्रों का उपयोग कृषि सूचना केन्द्रों के रूप में किये जाने से सही समय में समस्या की जानकारी प्राप्त हो सकेगी और समय रहते प्रबंधन किया जा सके। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय द्वारा एक टैबलेट आधारित सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है जिसमें कीड़ों एवं बीमारियों के प्रकोप एवं उससे होने वाले नुकसान की पहचान फोटोग्राफ्स के माध्यम से आसानी से की जा सकती है।

कृषि सेवा केन्द्रों को ये टैबलेट उपलब्ध कराये जाएंगे जिससे कि वे किसानों की फसलों पर होने वाले कीट या रोग के प्रकोप की सूचना विश्वविद्यालय तक पहुंचा सकें जिससे समय रहते इनका निदान एवं रोकथाम कर ली जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इस योजना को स्वीकृति दे दी गई है और जल्द ही राज्य भर में संचालित पांच हजार कृषि सेवा केन्द्रों के माध्यम से इसका क्रियान्वयन किया जाएगा।उन्होंने कहा कि कृषि सेवा केन्द्र संचालकों को भारत सरकार की कृषि कौशल विकास परिषद द्वारा संचालित विभिन्न कौशल विकास पाठ्यक्रमों में पंजीकृत कर राज्य शासन की कौशल विकास योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा।

किसानो के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण कृषि सेवा केन्द्रों के माध्यम से संचालित किये जाने की योजना है। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय के नये पाठ्यक्रम के तहत कृषि छात्रों के लिए तीन वर्ष तक खेतों पर काम करना अनिवार्य कर दिया गया है। चतुर्थ वर्ष के छात्र छः महीने की अवधि के लिए कृषि सेवा केन्द्र में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे जिससे उनमें कृषि व्यवसाय उद्यमिता का विकास होगा और वे आगे चल कर स्वयं का कृषि विकास केन्द्र भी स्थापित कर सकंेगे। डॉ. पाटील ने प्रश्नोत्तर सत्र के अंतर्गत कृषि सेवा केन्द्र संचालकों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।

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