डॉ. श्यामा प्रसाद मुख़र्जी ने राष्ट्र भक्ति और राष्ट्र प्रेम की पराकाष्ठा की- बृजमोहन

रायपुर।जिन लोगो ने राष्ट्र भक्ति में अपने प्राणो कर आहूति दे दी ऐसे लोगो के बारे में कभी भी देश को बताया नही गया न ही इतिहास में के पुस्तकों में भी उन्हे उचित स्थान नही दिया गया और न ही उन्हे पर्याप्त सम्मान दिया गया।ये बातें डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हे पुष्पाजंलि एवं श्रध्दा सुमन समर्पित करते हुए भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में उपस्थित कार्यकर्ताओं के संबोधन में प्रदेश के जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि आजादी के 60 से 70 वर्षो तक देश के उन महापुरूषो को जिन्होने राष्ट्र भक्ति और राष्ट्र प्रेम की पराकाष्ठा की. ऐसे लोगो में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान एक ज्वलन्त उदाहरण है जिन्होने पंजाब , बंगाल और जम्मू कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाये रखने के लिए अपने प्राणो की आहूति दे दी। देश में आजादी के पश्चात 60 वर्षो तक जो सरकारे रही उन लोगो ने एक ही परिवार और एक ही विचारधारा को महिमा मंडित करने का काम किया। इस दल-दल से एक सितारा उभरकर समाने आया जिसका नाम डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी है। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने नेहरू सरकार के तुष्टि करण निति के खिलाफ जोरदार आवाज बुलन्द की और उनकी सरकार में उद्योग मंत्री रहते हुए अपने मंत्री पद से सिर्फ इस बात के लिए इस्तीफा दे दिया कि एक देश में दो विधान, दो प्रधान और निशान मनजूर नही किया जा सकता डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने जम्मू कश्मीर में प्रवेश के लिए नेहरू सरकार के परमिट व्यवस्था का तीव्र विरोध करते हुए बिना परमिट के जम्मू कश्मीर की सीमा में प्रवेश किया और वही पे षडयंन्त्रकारी तत्वो ने उन्हे गिरफ्तार कर लिया इसी दौरान 23 जून सन् 1953 को संदेहास्पद परिथितियांे में उनकी मृत्यु हो गई। इस तरह उन्होने अखंड भारत के लिए अपने प्राण भारत माता के चरणो में चढ़ा दिये। आज पंजाब, बंगाल और जम्मू कश्मीर भारत के अभिन्न अंग है तो इसका सारा श्रेय डॉ. श्यामाप्रसाद मंुखर्जी को जाता है। आज डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के बलिदान स्वरूप ही हम कार्यकर्ताओं की पहचान है।
भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव कुमार अग्रवाल ने कहा कि अपने जमाने के महान शिक्षाविद प्रखर राष्ट्रवादी नेता के रूप में डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी हमेशा हमेशा के लिए हिन्दूस्तान के लोगो के दिलो में समाहित हो गये। 34 वर्षो के अलप्प आयु में ही डॉ. मुखर्जी बंगाल विश्व विद्वाालय के चंासलर बने जिस विद्यालय में उनके पिता प्रोफेसर थे उसी विश्व विद्यालय में डॉ. मुखर्जी का चांसलर बनना अपने आप में एक पिता और देश के लिए गर्व का विषय है। देश के लिए डॉ. मुखर्जी का जन्म किसी वरदान से कम नही था राष्ट्रवादी विचार धारा राष्ट्र भक्ति का प्रवाह डॉ. मुखर्जी ने इस देश में प्रयाग बहाया है वह युगो युगो तक यासद किया जायेगा। पं. मदनमोहन मालवीय के पश्चात डॉ. श्यामा प्रसयाद मुखर्जी ही ऐसे नेता थे जिन्होने भारत की सनातन संस्कृति को जीवित रखने के लिए हिन्दू महासभा की सदस्यता ग्रहण की उसके पश्चात उन्होने संघ के ततकालीक प्रमुख गुरूजी के आर्शीवाद से देश में राष्ट्रवादी विचारधारा से ओत प्रोत ऐक राजनीति दल का गठन किया जिन्हे हम सब जनसंघ के नाम से जानते है और डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी जनसंघ के पहले संस्थापक अध्यक्ष हुए। यहाँ से उनके राष्ट्रवादी विचारधारा की यात्रा तेजी से प्रारंभ हुई और आज देश और 14 राज्यो में राष्ट्रवादी विचारधारा का नेतृत्व विराजमान है।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से आर.डी.ए. के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, ऊर्दू एकादमी के अध्यक्ष मिर्जा एजाज बेग, प्रफुल्ल विश्वकर्मा, सूर्यकांत राठौर, वर्धमान सुराना, जिला पदाधिकारी मनोज प्रजापति, सत्यम दुवा, हेमेन्द्र साहू, बजरंग खंडेलवाल, बिन्दु महेश्वरी, श्याम सुंदर अग्रवाल, नवीन शर्मा, जितेन्द्र धुरंधर,सीमा साहू, श्याम चावला, अनिता महानंद, मुकेश शर्मा, अकबर अली, आशीष अग्रवाल, किशोर महानंद, शिवजलम दुबे, राजेश पाण्डेय, शैलेन्द्री परगनिहा, अमरजीत छाबड़ा, डॉ. कमल साहू, चन्द्रेश शाह, गोपी साहू, ऋतु शर्मा, आशीष दास, अजंय शुक्ला, आजाद गुरजर, सनोज वर्मा सहित सैकड़ो कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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