नशीली दवाओं की लत नकारात्मक प्रभाव डालती है : रामनाथ कोविंद

अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ और अवैध व्यापार निषेध दिवस समारोह में राष्ट्रपति ने मादक पदार्थों की रोकथाम के दुरुपयोग की रोकथाम में उत्कृष्ट सेवाओं राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए

नई दिल्ली : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ और अवैध व्यापार निषेध दिवस के अवसर पर मद्यपान और मादक पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम में उत्कृष्ट सेवाओं के राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि नशीली दवाओं की लत और मद्यपान की समस्या स्वास्थ्य, संस्कृति, विकास और राजनीति जैसे कई क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव डालती है जिनमें व्यक्ति, परिवार और समाज भी शामिल है। उन्होंने कहा कि नशे की लत गरीबी को जन्म देती है और हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ हमारे विकास तथा जन कल्याण लक्ष्यों को भी चुनौती देती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि म्यांमार-लाओस-थाईलैंड के ‘गोल्डन ट्राएंगल’ और ईरान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान के ‘गोल्डन क्रेसेंट’ कहे जाने वाले क्षेत्रों के बीच भारत की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति के कारण यह समस्या हमारे लिए और भी जटिल हो जाती है। सीमावर्ती क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की तस्करी के कारण इनके दुरुपयोग में बढ़ोतरी के साथ-साथ आतंकवाद और राजनीतिक अशांति की समस्याएँ भी जुड़ जाती हैं। इसीलिए पंजाब और मणिपुर जैसे सीमावर्ती राज्यों में और भी अधिक सतर्कता और निरंतर प्रयासरत रहने की आवश्यकता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि अवैध मादक पदार्थों के दुरुपयोग से स्वास्थ्य की भारी चुनौतियां पैदा हो रही हैं, खासकर युवा पीढ़ी और स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों पर इस खतरे का अधिक बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की समस्या को जागरूकता, रोकथाम की जानकारी, प्रोत्साहन, तथा समर्थन के प्रयासों से हल किया जा सकता है। इन प्रयासों में नशा-प्रभावित लोगों के प्रति करुणा और सहानुभूति भी आवश्यक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि माता-पिता, शिक्षकों, चिकित्सकों, स्थानीय और स्वैच्छिक संस्थाओं के लोगों को प्रशिक्षण दे कर चिकित्सा और पुनर्वास के प्रयासों में बड़े पैमाने पर शामिल किया जाना चाहिए। महामहिम ने कहा कि मुझे खुशी है कि इन दिशाओं में आगे बढ़ने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कदम उठाए जा रहे हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत, सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले; कृष्ण पाल गुर्जर और विजय सांपला भी मौजूद थे।

Back to top button