जन औषधि केंद्र में दवाईयां हो रही हैं गायब, जिला एवं सिम्स में लोगों को दिक्कतें

मनमोहन पात्रे :

बिलासपुर –

कम कीमत पर दवा उपलब्ध कराने शुरू किए गए जन औषधि केंद्र सिर्फ नाम के लिए चल रहे हैं। यहां करीब सौ प्रकार की दवा ही उपलब्ध है। जबकि 450 से ज्यादा प्रकार की दवाएं होनी चाहिए। ऐसे में यहां आने वाले मरीज निराश होकर लौट रहे हैं।

मरीजों को कम कीमत पर विश्वसनीय जीवन रक्षक दवा उपलब्ध कराने के लिए सिम्स और जिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र का संचालन हो रहा है। अक्टूबर में इन केंद्रों में दवा की सप्लाई नहीं की गई है। ऐसे में शार्टेज हो गई है।

वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत दवा खत्म हो चुकी है। अब लोगों को आयरन, कैल्सियम और मल्टी विटामिन जैसी दवा तक नहीं मिल रही है। सिर्फ सर्दी-बुखार के साथ कुछ सामान्य बीमारी की दवा उपलब्ध है। वे भी खत्म होने के कगार पर हैं।

इसकी वजह से रोजाना सिम्स व जिला अस्पताल में सैकड़ों मरीज को मजबूरी में निजी मेडिकल स्टोर जाना पड़ता है। वहां ब्रांडेट दवा के नाम पर 70 से 80 प्रतिशत महंगी दवा बेची जाती है। जल्द ही स्टाक नहीं पहुंचने पर जन औषधि केंद्रों में ताला लगने की आशंका है।

जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार ने अब दिल्ली से ही दवा का स्टाक भेजने का निर्णय लिया है। वहां से एक बार भी दवा नहीं भेजी गई। यह हाल प्रदेश के सभी जन औषधि केंद्रों का है। इसकी वजह से दवा की कमी हो गई है।

पेंट्रापजोल, एसिलाग, आयरन, कैल्सियम, मल्टी विटामिन, ओफ्लाक्सासिन, पेन किलर स्प्रे, मेट्रोजिल सीरप, ओमेप्राजोल, मेटफार्मिन, सेटिकोजिन, कफ सीरप के साथ बच्चों की दवा नहीं है। इसके अलावा गंभीर रोगों में दी जाने वाली जीवन रक्षक दवा भी खत्म हो गई है।

केंद्र सरकार लोगों को कम कीमत पर दवा दिलाने की यह महत्वाकांक्षी योजना शुरू की गई है। पीएम नरेंद्र मोदी की इस योजना से पूरे देश को लाभांवित करना है। लेकिन समय पर दवा नहीं पहुंचने के कारण लोगों को लाभ नहीं मिल रहा है।

जन औषधि केंद्र में दवा का वितरण अब दिल्ली से होना है। वहीं से स्टाक भेजा जाता है। अभी तक दवा नहीं आने से परेशानी हो रही है।
डॉ. बीबी बोर्डे
सीएमओ

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