जलवायु परिवर्तन के कारण मौत और बीमारी का बढ़ा खतरा

0.8 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि चिंता का विषय

लंदन :

जलवायु परिवर्तन के कारण भारत, अफ्रीका का उप-सहारा क्षेत्र और दक्षिण अमेरिका जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में काम के घंटों में उल्लेखनीय कमी आयी है. वैश्विक आबादी के एक बड़े हिस्से में गर्मी से होने वाली मौत और बीमारी का खतरा बढ़ रहा है.

जलवायु परिवर्तन के नतीजतन गर्मी से पैदा होने वाली संवेदनशीलता इस बात के संकेत हैं कि अब हमारा सामना गर्म वातावरण से अधिक हो रहा है. अध्ययन के अनुसार पिछले दो दशक में वैश्विक तापमान में औसतन 0.8 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है जो चिंता का विषय है.

हालांकि शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य, स्वास्थ्यकर्ताओं की नियुक्ति, परिवहन के स्वच्छ तरीकों और स्वास्थ्य प्रणाली के क्षेत्र में आशातीत वृद्धि की उम्मीद जतायी है.

ब्रिटेन के यॉर्क विश्वविद्यालय की हिलेरी ग्राहम ने कहा कि मौजूदा समय में गर्म हवाओं में बदलाव और श्रम की क्षमता शुरुआती चेतावनी की ओर इशारा करती है कि अगर तापमान ऐसे ही बढ़ता रहा तो लोगों के स्वास्थ्य पर घातक असर पड़ेगा.

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