भारी पुलिस तैनाती और बैरिकेडिंग के बीच लखीमपुर खीरी के आसपास जनजीवन हुआ अस्त-व्यस्त

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के आसपास भारी पुलिस तैनाती और बैरिकेडिंग से जनजीवन ठप हो गया है क्योंकि स्थानीय लोगों सहित अन्य लोगों को उस इलाके में आने-जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है जहां रविवार को हुई हिंसा में अब तक 9 लोगों की मौत हो गई है। पलिया, पूरनपुर, भीरा, बिजुआ और खजुरिया सहित आसपास के गांवों में पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। साथ ही हिंसा स्थल से कम से कम 60-70 किमी दूर वाहनों को रोका जा रहा है, जो दुधवा राष्ट्रीय उद्यान से लगभग 40-45 किमी दूर है।

नेपाल सीमा के पास स्थित इलाके में टूर और ट्रैवल बसों की सेवाएं भी ठप हो गई हैं। एक जानकारी के अनुसार, पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वे शांति से स्थिति को संभालें और किसानों के खिलाफ बल प्रयोग न करें। भारी पुलिस तैनाती के अलावा, सैकड़ों किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ सुबह से ही इलाके में जमा हो गए, जिसके कारण क्षेत्र में यातायात अवरुद्ध हो गया। लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए केवल पैदल यात्रा करने की अनुमति दी जा रही है।

रविवार को, जिले में कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन तब हिंसक हो गया, जब कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा कथित तौर पर किसानों पर गोलियां चलाईं। कुछ प्रदर्शनकारियों के वाहनों की चपेट में आने से आक्रोशित किसानों ने तीन जीपों में आग लगा दी। इनमें से एक वाहन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा का बताया जा रहा है। रविवार की हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है और भाजपा ने दावा किया कि मृतकों में एक ड्राइवर और तीन भाजपा कार्यकर्ता शामिल हैं।

इस घटना के बाद प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को लखीमपुर खीरी की ओर बढ़ने से रोक दिया गया। इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार देर रात जारी एक बयान में कहा है कि वह अपने राज्य में हुई हिंसा से दुखी हैं, जिसमें चार किसानों सहित नौ लोगों की मौत हो गई थी। उन्होंने जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया और शांति बनाए रखने की अपील की।

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