रायपुर

लॉक डाउन की मार,राजधानी में निजी स्कूलों के शिक्षकों का वेतन हुआ आधा,घर चलाना मुश्किल

न्यूनतम वेतनभोगी शिक्षकों को घर चलाना मुश्किल

रायपुर। कोरोना वायरस (covid-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में लगाए गए लॉकडाउन से निजी स्कूलों में कम वेतन पर काम करने वाले शिक्षकों की कमर टूट गई है. लगातार स्कूल बंद होने से बच्चे की फीस नहीं आ रही है, नतीजा शिक्षकों को वेतन के लाले पड़ गए हैं.

राजधानी रायपुर के सरस्वती शिशु मंदिर, रामकृष्ण विद्यालय, आदर्श नगर विद्यालय, प्रज्ञा विद्या मंदिर समेत कई स्कूल के शिक्षकों को लंबे समय से स्कूल बंद होने से वेतन की समस्या हो रही है.

प्राचार्य विनोद पाण्डेय ने बताया कि इस माह किसी भी शिक्षक का वेतन नहीं मिला है, और आगे काफी समस्या होगी. मार्च से लॉक डाउन के वजह से बची हुई फीस भी बाकी है, जिसकी वजह से दिक्कतें हो रही है. उन्होंने बताया कि हमारे यहां 260 छात्र हैं, तो वहीं 15 शिक्षक हैं. अगर ऐसा ही चलता रहा तो हम जैसे न्यूनतम वेतनभोगी शिक्षकों को घर चलाना मुश्किल होगा.

प्राचार्या इरावत भूषण परगनिहा ने बताया कि फरवरी माह से बच्चों की फीस अटकी हुई है, और चौथा महीने आने को है. जैसे-तैसे कर स्टाफ को सैलरी दे रहे थे, लेकिन अब देना मुश्किल हो गया है. एक तरफ तो प्रशासन कहता है कि आप स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों से फीस नहीं ले सकते, लेकिन ऐसे स्कूलों का क्या जिनकी सैलरी बच्चो की फीस पर ही निर्भर हो.

शिक्षक नारायण साहू ने कहा कि मेरी तनख्वाह वैसे भी कम है, अब आगे सैलरी नहीं मिलेगी, तो घर चलाना मुश्किल होगा. वहीं शिक्षिका अमीना साहू का कहना है कि अब तक की सैलरी जैसे-तैसे करके मिल गई, लेकिन आगे मुश्किल है और स्थिति भी ठीक नहीं है.

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