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जर्जर छत और बगैर खिड़कियों वाले कमरे में बनता है मिड डे मील

झारखंड सरकार स्कूलों में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए हर महीने करोड़ों रुपए खर्च करती है. केंद्र की ओर से भी भवन, शौचालय और रसोई घर पर भी बहुत खर्च होता है लेकिन गोड्डा के पथरगामा प्रखंड मुख्यालय स्थित कबूतरी प्राइमरी स्कूल को देख कर ऐसा नहीं लगता.

वर्ष 1901 में स्थापित इस स्कूल का भवन तो ठीक है, मगर मध्याह्न भोजन जहां बनता है उसे देख कोई भी दंग रह जाएगा. यहां भोजन जर्जर हो चुकी छत, और बगैर खिड़कियों वाले कमरे में बनता है और बच्चे वहीं बैठकर खाना खाते हैं.

बरसात के दिनों में कब कहां से विषैले जीव जंतुओं का आक्रमण इन नौनिहालों पर होगा कहना मुश्किल है इससे अभिवावक चिंतित हैं और रसोइया हालात से मजबूर है.

स्कूल के हेडमास्टर तो स्कूल में मौजूद नहीं थे मगर एक शिक्षक ने बताया कि विगत दस वर्षों से रसोई घर के लिए विभाग को लिखा जा रहा है मगर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है.

इस बारे में जिला शिक्षा अधीक्षक से जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंध समिति की तरफ से कोई आवेदन नहीं मिला है. मामला संज्ञान में आया है, राशि जल्द ही उपलब्ध करा दी जाएगी.

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