कोरोना संकट के दौर में गत डेढ़ दो वर्षों से विद्यामितान घर बैठे हैं बिना वेतन लाचार, बिकने लगे हैं घर द्वार! अब तो रहम (विद्यामिताननियमितीकरण) करो छत्तीसगढ़ सरकार

ब्यूरो चीफ:- विपुल मिश्रा

रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य के दूरस्थ, दुर्गम, बीहड़, अभावग्रस्त, आदिवासी बहुल, वनांचल क्षेत्रों में अल्प वेतन् में गत कई वर्षों से शैक्षिक सेवा दे रहे, विद्यामितान शिक्षक (जिनको वर्तमान सरकार ने अतिथि शिक्षक नाम दिया है) सरकार के दिये आश्वासनों के भरोसे आज पर्यंत अपने भविष्य सुरक्षित होने की राह देख रहे हैं।

कौन हैं विद्यामितान?

शैक्षणिक सत्र 2015 – 16 में तत्कालीन सरकार के द्वारा प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से संबंधित जिलों के जिला स्वरोजगार एवं मार्गदर्शन केंद्रों में वांछित योग्यता पूर्ण करने वाले (निर्धारित विषय में स्नातकोत्तर और बी. एड. प्रशिक्षित) छत्तीसगढ़ के मूल निवासी युवाओं की नियुक्ति इंटरव्यू के माध्यम से मेरिट आधार पर की गयी थी।

2018 में विधानसभा चुनाव पूर्व विद्यामितान शिक्षकों के नियमितीकरण हेतु हुए आंदोलन में तत्कालीन विपक्ष की भूमिका निभा रहे कांग्रेस पार्टी के तमाम नेताओं ने इनके नियमितीकरण की मांग को जायज ठहराते हुए_ छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने पर नियमितीकरण करने का आश्वासन दिया था। उस समय इन शिक्षकों की संख्या 2516 थी, तत्पश्चात कांग्रेस सरकार आने के बाद इनकी नियुक्ति अतिथि शिक्षक के रूप में की गयी, विविध कारणों से सीटों की कमी होने से इन शिक्षकों की संख्या 2220 के आसपास सिमट के रह गयी और इनके कुछ साथी वंचित रह गए!

तत्पश्चात कोरोना संकट के दौर में गत वर्षों से ये शिक्षक अपने आजीविका के संकट से जूझ रहे हैं, कुछ शिक्षक तो कर्ज में इतने दब गए हैं, कि उनको अपना घर भी बेचना पड़ रहा है, बावजूद इसके सरकार एक ओर नये अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के शिक्षकों को विद्यामितानों से दो ढाई गुना अधिक वेतन पर कोरोना संकट के बावजूद वेतन भुगतान कर कार्य उपलब्ध करा रही है!

वहीं दूसरी ओर अपातकाल में जहाँ कोई प्रशासनिक अमला जाना नहीं चाहता वहाँ सरकार के साथ कंधे से कंधा मिला कर बीहड़, दुर्गम, आभावग्रस्त क्षेत्रों के नौनिहालों की शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने वाले विद्यामितान आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं, इन शिक्षकों को पूरे कोरोना महामारी के दौर में आज पर्यंत 17 महीने में केवल 45 दिन का वेतन दिया गया है। जिससे सभी शिक्षक अवसाद ग्रस्त हो गए हैं । मकानों के बिकने की स्थिति आ गयी है_

छत्तीसगढ़ सरकार को चाहिए की इनकी दयनीय दशा का ख्याल रखते हुए, अपने चुनावी घोषणा पत्र के पेज 35 अंतिम लाइन में किये #विद्यामिताननियमितीकरण के वादे को अविलंब पुरा करते हुए विद्यामितान शिक्षकों को भी समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान करना चाहिए!

ज्ञात हो, कि इन शिक्षकों की कर्त्तव्य निष्ठा, कार्य के प्रति समर्पण और बीहड़ वनांचल के उठते शैक्षिक स्तर के बलबूते इन शिक्षकों की स्वयंसिद्ध उपयोगिता को देखते हुए, पूर्व तथा वर्तमान सरकारों के आधा सैकड़ा से भी अधिक पक्ष/विपक्ष सभी वर्ग के नेता, मंत्री, सांसद तथा विधायकों के द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी को अनुशंसा पत्र प्रेषित किए हैं इसके साथ ही जब वर्तमान सरकार विपक्ष में थी तब, इनके सभी विधायकों, सांसदों तथा तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष रहे वर्तमान स्वास्थ्य एवं पंचायत मंत्री श्री टी. एस. सिंहदेव बाबाजी, पूर्व के सांसद वर्तमान गृह मंत्री आदरणीय ताम्रध्वज साहू जी, पूर्व के विधायक वर्तमान आबकारी मंत्री श्री कवासी लखमा, पूर्व के विधायक वर्तमान राजस्व मंत्री श्री जयसिंह अग्रवाल सहित सभी वर्तमान एवं पूर्व के नेताओं/मंत्रियों/विधायकों के द्वारा विद्यामितान शिक्षकों के नियमितीकरण के लिए पत्र व्यवहार किया गया था
जो निम्नानुसार है-
1. श्री टी. एस. सिंहदेव पूर्व नेता प्रतिपक्ष छत्तीसगढ़ विधानसभा एवं वर्तमान मंत्री पंचायत, स्वास्थ्य एवं वाणिज्यिक कर पत्र क्रमांक 504 दिनांक 29/03/2018

2. श्री ताम्रध्वज साहू पूर्व सांसद, दुर्ग वर्तमान गृह मंत्री पत्र क्रमांक 4890/ सांसद/दुर्ग दिनांक 15/05/2018

3. डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम मंत्री स्कूल शिक्षा विभाग पत्र क्र./ 106/मंत्री/ स्कूल शि. अनु. ज. जा, अ. पि. व. एवं अ. सं. क. सह/20/दिनांक 03.02.2019

4. कवासी लखमा पूर्व उपनेता प्रतिपक्ष एवं वर्तमान मंत्री आबकारी विभाग पत्र क्र. A4 – 1643 दिनांक 07.08.2018

5. श्रीमती अनिला भेड़िया पूर्व विधायक डौण्डिलोहारा एवं वर्तमान मंत्री महिला एवं बालविकास पत्र क्र. 1184 दिनांक 08/08/2018

6. श्री जयसिंह अग्रवाल पूर्व विधायक कोरबा पत्र क्रमांक MLA/K/cs/18/241 दिनांक 31.03.2018

7. श्रीमति देवती कर्मा पूर्व एवं वर्तमान विधायक दंतेवाड़ा, पत्र क्रमांक निरंक् दिनांक 19.04.2018

8. अरुण वोरा पूर्व एवं वर्तमान विधायक दुर्ग शहर, पत्र क्रमांक निरंक् दिनांक 03.05.2018

9. बृहस्पत् सिंह विधायक रामानुजगंज, पत्र क्रमांक 139 दिनांक 23/02/2020

10. रामकुमार यादव विधायक चंद्रपुर (राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त) पत्र क्र. B-81/उपाध्यक्ष/ छ.ग.रा.ग्रा. एवं अ.पि.व.वि.प्राधि. /छ.ग./2021 दिनांक 23.01.2021

11.राज्यपाल के सचिव, पत्र क्रमांक 3514/5155/2020/रास/ शि.प्र. रायपुर, दिनांक: 08/07/2020

12.डॉ. चरणदास महंत, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ विधान सभा, अर्ध शास्. पत्र क्र. 495/ अ. वि. स. / रायपुर, दिनांक 09.03.2021

13. उमेश पटेल, वर्तमान उच्च शिक्षा मंत्री एवं पूर्व विधायक खरसिया विधान सभा पत्र क्र. 0265/MLA/18/APR/2018 दिनांक- 16.04.2018

14. देवेंद्र यादव वर्तमान विधायक एवं पूर्व महापौर भिलाई, पत्र क्रमांक 151 दिनांक 10.05.2018

विधान सभा चुनाव वर्ष 2018 के दौरान कांग्रेस जनघोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष रहे टी. एस. सिंहदेव बाबाजी ने विशेष रुचि लेते हुए विद्यामितान शिक्षकों की नियमितीकरण की जायज मांगों का समर्थन करते हुए पत्र लिखते हुए कांग्रेस जन घोषणा पत्र में प्रमुखता से विद्यामिताननियमितीकरण की बात शामिल भी किया है, बावजूद इसके आजपर्यंत इन शिक्षकों की समस्याओं पर छत्तीसगढ़ सरकार की चुप्पी समझ से परे है।

सरकार में आने से पूर्व किया था वादा:

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के द्वारा 2018 विधानसभा चुनाव पूर्व जारी जनघोषणा पत्र के पेज क्र. 35 अंतिम लाइन में उल्लिखित वादे के बिंदु _”वे विद्यामितान, जो छत्तीसगढ़ के नागरिक हैं, की नियमितीकरण, रिक्त पदों पर, प्राथमिकता से की जाएगी। ” के अनुसार इन शिक्षकों को छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार पर पूरा भरोसा है, कि वे छत्तीसगढ़ के मूल निवासी विद्यामितान अतिथि शिक्षकों को अविलंब नियमितीकरण की सौगात देंगे।

नये नये प्रयोगों से कर रहे, अपनी समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षण : कोरोना संकट के दौर में बीते वर्षों से आज पर्यंत कोरोना नियंत्रण के निर्धारित प्रोटोकाल का अक्षरशः पालन करते हुए, सभी विद्यामितान शिक्षक उचित माध्यमों का प्रयोग करते हुए, ट्विटर, फेसबुक, सोशल मीडिया, प्रतीकात्मक संकेतों के द्वारा प्रदेश के मुखिया को अपनी जायज मांगें, तकलीफ, और पीड़ा को सुनाने जतन कर रहे हैं।

प्रदेश के मुखिया से अपील :

इन शिक्षकों की गत कई वर्षों की नि:स्वार्थ सेवा और वर्तमान स्थिति में इन शिक्षकों के समक्ष उपजी गंभीर समस्याओं को देखते हुए, हम छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुखिया से यह अपील करते हैं, कि इनकी मार्मिक स्थिति पर संवेदना पूर्वक विचार करते हुए इन शिक्षकों से किये नियमितीकरण के वादे को अविलंब पूर्ण करने की कृपा करें! ताकि प्रदेश में सुदूर वनांचल के अभावग्रस्त क्षेत्रों के नौनिहालों को इन शिक्षकों की सेवा अनवरत मिलती रहे।

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