क्या 31 जनवरी को चंद्र ग्रहण से पहले इस वजह से आया भूकंप?

भूकंप भी गुरुत्वाकर्षण के घटने और बढ़ने के कारण ही आते हैं

क्या 31 जनवरी को चंद्र ग्रहण से पहले इस वजह से आया भूकंप?

साल 2018 के पहले महीने जनवरी के अंतिम दिन यानी 31 जनवरी को चंद्रग्रहण के सूतक काल शुरू होने से पहले ही भूकंप आया। दिल्ली-एनसीआर में बुधवार को भूकंप का तेज झटका महसूस किया गया। दिल्ली में काफी देर तक यह झटका महसूस किया गया। दिल्ली में काफी देर तक झटके महसूस किए गए। झटके इतने तेज थे कि लोग ऑफिस और घरों से बाहर निकल आए। पूरे उत्तर भारत में भूकंप के ये झटके महसूस किए गए। लोगों ने भूकंप के झटके जम्मू-कश्मीर और श्रीनगर में भी महसूस किए। भारत में ये झटके दिन के करीब 12 बजकर 40 मिनट पर महसूस किए गए। कई ज्योतिषों के मुताबिक चंद्र ग्रहण का सीधा संबंध भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होता है।
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चंद्र ग्रहण के दौरान या इसके कुछ दिनों बाद आते रहे हैं भूकंप
चंद्र ग्रहण के दौरान या उसके कुछ दिनों बाद यह देखा गया है कि इस दिन समंदर में भी पहले के मुकाबले ज्यादा हलचल होती है। साथ ही इसका धरती पर प्रभाव होता है जो कई बार भूकंप के रूप में प्रकट होता है। पौराणिक काल से ही यह मान्यता है कि राहु और केतु को समुद्र मंथन से जोड़ा गया है और इन्हें ज्योतिष छाया ग्रह मानता है। भूकंप आने व प्राकृतिक आपदाओं की भविष्यवाणी भी खगोलीय घटनाओं से की जाती है। चंद्र ग्रहण के 41 दिन बाद तक गुरुत्वाकर्षण घटने या बढ़ने से धरती पर भूकंप की संभावना रहती है। जरुरी नहीं है कि यह भूकंप चंद्र ग्रहण के दिन ही आए बल्कि इसके कुछ दिनों आगे या पीछे भूकंप जरूर आए हैं। इससे पहले भी ऐसा देखा गया है कि भूकंप चंद्रग्रहण के दिन या उसके कुछ दिनों बाद जरूर आया है।

पुष्य नक्षत्र बना भूकंप का कारण?
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक चंद्रग्रहण के दिन पुष्य नक्षत्र कर्क राशि पर पड़ रहा है और ऐसे में धरती पर भूकंप की आशंका होती है। क्योंकि इस स्थिति में धरती में हलचल होती है जो भूकंप के रूप में प्रकट होती है। साल का पहला पूर्ण चंद्रग्रहण बुधवार 31 जनवरी को कर्क राशि और पुष्य व अश्लेषा नक्षत्र में होगा। इसकी अवधि 3 घंटे 24 मिनट की होगी। कई ज्योतिषियों के मुताबिक पुष्य नक्षत्र की वजह से भूकंप आने की संभावना होती है। यह भी बताया जाता है कि इसका प्रभाव 10 दिनों तक रहता है। यानी इस बात को कुछ देर के लिए मान लिया जाए तो भूकंप की संभावना 1 फरवरी से 9 फरवरी के बीच भी हो सकती है। लेकिन टाइम्स नाउ हिंदी ऐसे किसी भी दावे की पुष्टि नहीं करता है। यह भी कहा जा रहा है कि चंद्रग्रहण की घटना के 15 दिनों बाद 15 फरवरी को फागुन कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सूर्य ग्रहण की घटना होगी। ज्योतिष विज्ञान से जुड़े लोगों के मुताबिक 15 दिनों में दो ग्रहण पड़ना शुभ संकेतों को जन्म नहीं दे रहा है। इससे पृथ्वी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

पुष्य नक्षत्र क्या होता है?
‘तिष्य और अमरेज्य’ जैसे अन्य नामों से भी पुकारे जाने वाले इस नक्षत्र की उपस्थिति कर्क राशि के 3-20 अंश से 16-40 अंश तक है। ‘अमरेज्य’ का शब्दिक अर्थ है, देवताओं के द्वारा पूजा जाने वाला। शनि इस नक्षत्र के स्वामी ग्रहों के रूप में मान्य हैं, लेकिन गुरु के गुणों से इसका साम्य कहीं ज्यादा बैठता है। पुष्य, अनुराधा और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है और नीलम शनि का रत्न है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति का जन्म पुष्य, अनुराधा और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में हुआ है, तो उसे नीलम धारण करने से लाभ होता है।

चंद्रमा के नजदीक होने का धरती पर प्रभाव
इस समय चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है, जिससे गुरुत्वाकर्षण का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। इसी वजह से समुद्र में ज्वार भाटा आते हैं. भूकंप भी गुरुत्वाकर्षण के घटने और बढ़ने के कारण ही आते हैं। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि चंद्रग्रहण की वजह से धरती पर भूकंप की भी संभावना बढ़ जाती है।

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