विचारसंपादकीय

अमेरिका इतना हिंसक क्यों है ?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

अमेरिका के प्रसिद्ध शहर लास वेगास मे एक ही झटके में पचासों लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हो गए। ऐसी घटनाएं, कमोबेश, अमेरिका में अक्सर होती रहती हैं। जाहिर है कि यह इस्लामी आतंकवाद की घटना नहीं थी तो फिर यह क्या थी ? यह ऐसा सवाल है, जो अमेरिकी सभ्यता को बेनकाब कर देता है। स्टीफन पेडॉक नामक इस गोरे आदमी ने एक होटल के कमरे से इतनी गोलियां चलाईं कि सैकड़ों लोग हताहत हो गए। उसके कमरे में 10 बंदूकें पाई गईं और उसकी अपनी लाश भी ! यदि वह जिंदा पकड़ा जाता तो शायद इस हत्याकांड के सही कारण का पता चल जाता लेकिन हम तो सिर्फ अंदाज ही लगा सकते हैं। पेडॉक कोई गरीब आदमी नहीं था। उसका अपना हवाई जहाज है, अपना मकान है, अच्छी-खासी नौकरी भी रही है। तो क्या वजह हो सकती है, उसकी इस पशुता की ? मुझे इसके दो कारण दिखाई पड़ते हैं। पहला तो यह कि अमेरिका में परिवार नामक संस्था में बहुत गिरावट आ गई है। बच्चों को माता-पिता ठीक से संस्कार नहीं दे पाते हैं। व्यक्तिवादी व्यवस्था में बच्चे बड़े होते-होते स्वछन्द हो जाते हैं। उन्हें मान-मर्यादा, लिहाजदारी, संबंधों की आत्मीयता आदि का कोई खास ख्याल नहीं रहता। भौतिक सुख-सुविधाएं ही जीवन का अंतिम लक्ष्य बन जाता है। अमेरिकी नागरिकों का यह एकाकीपन उनमें गहरी हताशा, तीव्र आक्रोश और विषैले प्रतिशोध का भाव भर देता है। वे मानसिक तौर पर बीमार हो जाते हैं और इस तरह के हत्याकांड कर बैठते हैं। दूसरा कारण है- अमेरिका की ढीली-ढाली शस्त्र-धारण नीति। अमेरिका के कई राज्यों के नागरिक अपने पास जितने चाहें, उतने शस्त्र रख सकते हैं। लास वेगास के नेवादा प्रान्त में तो लाइसेंस की भी जरुरत नहीं होती। अमेरिका में बहुत कम घर ऐसे हैं, जिनमें बंदूक या पिस्तौल न हो। अमेरिका की यह शस्त्र-संस्कृति उसके जन्म के साथ जुड़ी हुई है। दो सौ-ढाई सौ साल पहले यूरोपीय लोगों ने वहां से आकर अमेरिका पर कब्जा किया तो उन्हें पग-पग पर शस्त्र इस्तेमाल करने पड़े थे- मूल निवासियों को दबाने के लिए। हिंसा की वही प्रवृत्ति आज भी जीवित है। अमेरिका की अनेक अच्छाइयां हैं लेकिन आज दुनिया में वह अपराध का सबसे बड़ा अड्डा है। अमेरिका की जेलों में आज जितने कैदी हैं, दुनिया के किसी भी देश में नहीं हैं। अमेरिका दुनिया का सबसे अधिक शक्तिशाली और सुरक्षित देश है लेकिन अमेरिकी नागरिक सबसे अधिक असुरक्षित और भयभीत नागरिक हैं।

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