टीडीपी सांसद के ठिकानों पर ईडी का छापा, 57 अरब रुपये के दस्तावेज लगे हाथ

ये कंपनियां जांच एजेंसियों की नजर में तब आईं जब तीन बैंकों ने बीसीईपीएल द्वारा 364 करोड़ रुपये के लोन नहीं चुकाने की शिकायत की

नई दिल्ली। तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के राज्यसभा सांसद वाई एस चौधरी के ठिकानों पर तलाशी अभियान में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों को जो दस्तावेज हाथ लगे हैं,

उनसे चौधरी और उनके सहयोगियों की नियंत्रण वाली कंपनियों द्वारा बैंकों को 57 अरब रुपये का चूना लगाए जाने का मामला उजागर हुआ है। चौधरी एनडीए सरकार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री रह चुके हैं।

शुक्रवार को ईडी अधिकारियों ने उनके सुजाना ग्रुप की बैंक धोखाधड़ी के मामले में हैदरबाद और दिल्ली के आठ ठिकानों की तलाशी ली थी।

एक ठिकाने से मिले डॉक्युमेंट्स में सांसद की ग्रुप कंपनियों पर ईडी, सीबीआई और राजस्व खुफिया निदेशालय (डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस) के लंबित मामलों का पता चला है। इससे पहले, अक्टूबर महीने में तलाशी अभियान के दौरान ईडी ने विभिन्न शेल कंपनियों के 126 रबर स्टांप सीज किए थे।

ये कंपनियां जांच एजेंसियों की नजर में तब आईं जब तीन बैंकों ने बीसीईपीएल द्वारा 364 करोड़ रुपये के लोन नहीं चुकाने की शिकायत की और सीबीआई के बेंगलुरु ऑफिस में प्राथमिकियां (FIRs) दर्ज करा दीं।

इन बैंकों में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 133 करोड़ रुपये और आंध्रा बैंक ने 71 करोड़ रुपये को लोन डिफॉल्ट का, तो कॉर्पोरेशन बैंक ने 159 करोड़ रुपये के घाटे का मुकदमा दर्ज कराया।

बीसीईपीएल चौधरी के मालिकाना हक वाले एक मकान से संचालित होती है। उसी बिल्डिंग से सुजाना ग्रुप की अन्य कंपनियां भी संचालित होती हैं। सईडी ने चौधरी को इस संबंध में पूछताछ के लिए 27 नवंबर को तलब किया गया है।

ईडी ने शुक्रवार को पूर्व मंत्री के हैदराबाद स्थित आवासीय परिसर से छह बेहद लग्जरी कारें भी जब्त कीं। इनमें फेरारी, रैंज रोवर, मर्सिडीज बेंज आदि शामिल हैं। सभी छह कारों के रजिस्ट्रेशन फर्जी कंपनियों के नाम पर हुए हैं।

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