शिक्षा व रोजगार का संकट देश में एक बड़ी चुनौती : सुरजीत मजूमदार

भारत के लिए लोग मंच का सेमिनार संपन्न

रायपुर। भारत के लिये लोग मंच की रायपुर इकाई के तत्वावधान में आनंद समाज वाचनालय के सभागृह में षिक्षा व रोजगार का संकट और हमारी भूमिका विषय पर आयोजित सेमीनार संपन्न हुआ। इसमें राजधानी के छात्र-नौजवान-बुद्धिजीवी, महिलायें, ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता एवं संस्कृतिकर्मी बडी संख्या में उपस्थित रहे।

सेमिनार की अध्यक्षता रायपुर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सुरेन्द्र महापात्र ने की। आल इंडिया इंष्योरेंस एम्पलाईज एसोसियेशन के सहसचिव बी. सान्याल ने विषय का प्रस्तुतिकरण करते हुए बताया कि आज के चुनावी परिदृष्य में जनता से जुडे असली मुद्दों को ही गायब किया जा रहा है।

इसलिए शिक्षा, रोजगार, भ्रष्टाचार, महंगाई, कृषि संकट जैसे मुद्दों पर इस मंच के माध्यम से देष भर में परिचर्चायें की जा रही है ताकि चुनाव अभियान को जन मुद्दों पर केन्द्रित किया जा सके।

सेमिनार के मुख्य वक्ता देश के उभरते अर्थशास्त्री एवं जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली में अर्थशास्त्र के प्राध्यापक सुरजीत मजूमदार ने अपने विस्तृत व्याख्यान में अनेक तथ्यों एवं आंकडों के साथ विषय पर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कहा कि शिक्षा व रोजगार का संकट हमारे समाज में विस्फोटक स्थिति पैदा कर रहा है।

यदि इस संकट से निकलने का रास्ता नहीं खोजा गया तो इसके गंभीर दुष्प्रभाव होंगे । उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद हमारे देष की सरकारों द्वारा किये गये आधे-अधूरे भूमि सुधारों व कृषि पर सार्वजनिक निवेष की कमी ने कृषि क्षेत्र में रोजगारों के अवसर कम किये तथा इस कारण औद्योगीकरण की प्रक्रिया हेतु कृषि क्षेत्र से कोई विषेष प्रोत्साहन नहीं मिला।

देश में नव-उदारवादी नीतियां लागू किये जाने तथा कृषि षोध, तकनीक व प्रक्रियाओं पर सार्वजनिक क्षेत्रों का नियंत्रण समाप्त कर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रभुत्व के बाद कृषि की स्थिति आज इतनी खराब है कि इस पर निर्भर 90 प्रतिषत आबादी का गुजारा संभव नहीं हो पा रहा है।

इसके चलते करोडों की संख्या में लोग मजबूरन कृषि क्षेत्र के बाहर रोजगार की संभावनायें तलाश रहे हैं। लेकिन हमारे देष का निजी क्षेत्र रोजगारमूलक विकास कार्याे के स्थान पर अधिकाधिक मुनाफा बटोरनेवाले कार्यो पर निवेष कर रहा है और दूसरी ओर सरकार द्वारा सार्वजनिक व्यय में भारी कटौतियां जारी है इसके चलते कृषि क्षेत्र के बाहर भी नये रोजगार पैदा नहीं हो रहे हैं और वर्तमान रोजगारों में भी कटौतियां जारी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार कितने भी आंकडे छिपाने की कोषिष करे सच्चाई यह है कि एक सर्वे के अनुसार भारत में 15 से 59 वर्ष के आयु समूह की 75 से 80 फीसद महिलायें तथा 25 से 30 फीसद पुरूष रोजगारविहीन हैं ।

षिक्षा की स्थिति पर बोलते हुए श्री सुरजीत मजूमदार ने कहा कि आज के दौर में भारत में षिक्षा की मांग तेजी से बढी है । आज 18 से 23 वर्ष की आयु समूह के 25 फीसद युवा उच्च षिक्षा प्राप्त कर रहे हैं जबकि 20 वर्ष पहले उच्च षिक्षा केन्द्रों में इनकी संख्या 5 फीसद तथा 10 वर्ष पहले 11 फीसद थी । बेहतर जीवन की आकांक्षा में षिक्षा की बढती मांग के बावजूद षिक्षा पर सरकारी खर्च कम होता गया है । आज स्कूली षिक्षा का 45 फीसद तथा महाविद्यालयीन षिक्षा का 64 फीसद निजी क्षेत्र में है । इसके चलते विद्यार्थियों को षिक्षा हेतु महंगी कीमत चुकानी पडती है।

सरकारी षिक्षा में भी फीस में लगातार वृद्धि जारी है । बेहतर रोजगार की तलाष में षिक्षा पर भारी-भरकम खर्च करने वाले विद्यार्थियों के लिये देष में रोजगार के अवसर बहुत सीमित है । आकांक्षाओं एवं वास्तविकताओं के बीच बढती इस खाई को षीघ्र न पाटा गया तो इसके सामाजिक व राजनीतिक परिणाम विनाषकारी होंगे।

सुरजीत ने उपस्थित जनसमूह से आव्हान किया कि केन्द्र सरकार की नीतियों के खिलाफ देष के बेहतर भविष्य हेतु सरकारों पर षिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, कृषि, आधारभूत संरचनाओं, जन सुविधाओं सहित बुनियादी क्षेत्रों में सार्वजनिक व्यय बढाने हेतु दबाव कायम करें । हमारे देष में जीडीपी के 3 फीसद की सीमा तक सरकारी घाटे को सीमित रखने का प्रचलित नियम तर्कसंगत नहीं है । विकसित देषों में जीडीपी का 40 से 45 प्रतिषत तक सरकारी खर्च होता है । इसी प्रकार हमारे देष में प्रति व्यक्ति सार्वजनिक व्यय दुनिया के अन्य देषों से कम है।

अतः सरकारी व्यय में वृद्धि कर निजी क्षेत्रों पर रोजगार उत्पादन का दबाव बढाकर एवं कार्पोरेट क्षेत्रों में करों में बढोतरी कर रोजगार में वृद्धि संभव है । रोजगार में वृद्धि से जनता की क्रयषक्ति बढेगी जिससे मांग बढेगी तथा अर्थव्यवस्था का ठहराव भी दूर होगा । अतः जनपक्षीय मुद्दों, सर्वसमावेषी विकास एवं सबको बराबरी के अधिकार हेतु एक सषक्त आंदोलन तैयार करना ही सच्ची देषभक्ति है ।

व्याख्यान के पश्चात् सुरजीत ने श्रोताओं द्वारा पूछे गये प्रष्नों का जवाब देकर उनकी षंकाओं का समाधान भी किया। सेमिनार का संचालन मंच के संयोजक धर्मराज महापात्र तथा आभार प्रदर्षन रायपुर डिवीजन इंष्योरेंस एम्पलाईज यूनियन के महासचिव अतुल देषमुख द्वारा किया गया।

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