दो टूक (श्याम वेताल) : चुनाव संग्राम-लगी है आरोपों की झड़ी उसकी लाइन से मेरी लाइन बड़ी

Vetal-Sir
श्याम वेताल

छत्तीसगढ़ में चुनाव महाभारत अब अंतिम चरणों में हैं. महारथी अपने दिव्यास्त्रों का प्रयोग कर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश में लगे हैं. दो बड़े महारथी भाजपा और कांग्रेस एक दूसरे पर आरोप कर रहे हैं और लोगों को बता रहे हैं कि मेरी कमीज़ ज्यादा उजली है. छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी पीछे नहीं है. ये दोनों दल भाजपा और कांग्रेस को निकम्मा साबित कर रहे हैं.

बहरहाल, चुनाव है तो आरोप प्रत्यारोप का दौर चलना स्वाभाविक है लेकिन सवाल उठता है कि इन आरोपों को मतदाता कितने गंभीरता से लेता है. मतदाता को भी मालूम है कि आरोप लगाकर नेता अपनी लाइन सामने वाले की लाइन से बड़ी करना चाहते है, जबकि ऐसा होता नहीं है.

वैसे तो हर बार चुनाव आते ही पार्टियां अपने – अपने पक्ष में विभिन्न तरीकों से विज्ञापन करती है. लेकिन इस बार भाजपा कांग्रेस ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए ज्यादा प्रचार किया. टीवी पर एक विज्ञापन भाजपा की ओर से तो दूसरा कांग्रेस की ओर से देखने को मिला. हर 15 मिनट में आ रहे इन विज्ञापनों से मतदाता न केवल भ्रमित हो रहे हैं बल्कि ऊब भी रहे हैं और विज्ञापन के आते ही या तो चैनल बदलते हैं या फिर टीवी की आवाज़ धीमी कर देते हैं. इस बार अखबारों और सोशल मीडिया में विज्ञापनों की कमी दिखाई पड़ी.

पहले चरण की 18 सीटों के लिए हुए मतदान के बाद शेष 72 सीटों के लिए 20 नवंबर को वोटिंग होनी है. पहले चरण के 18 सीटों के लिए हुए मतदान के बाद भाजपा और कांग्रेस के जीत के अपने-अपने दावे हैं. भाजपा दावा कर रही है कि उसे 18 में से 14 सीट पर जीत का विश्वास है जबकि कांग्रेस 16 सीटों पर जीतने का भरोसा रखती है.

जैसे कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने छत्तीसगढ़ की 90 सीटों में से 65 सीट जीतने का लक्ष्य रखा है लेकिन कांग्रेस इस लक्ष्य का मखौल उड़ाते हुई दावा करती है कि भाजपा को 30-35 से ज्यादा सीटें हासिल नहीं होंगी और उसके विधायको को विधानसभा में विपक्ष की सीट पर बैठना होगा.

कांग्रेस अपने दावों के पक्ष में कहती है कि भाजपा पिछले 15 सालों से सरकार में हैं और इस दौरान उसके नेताओं और अफसरों ने राज्य को जमकर लूटा है. भाजपा विकास का दावा करती है लेकिन विकास की आड़ लेकर मंत्रियों, नेताओं और अफसरों ने अपनी तिजोरियां भरी है. पूरी पार्टी और सरकार ने भ्रष्टाचार किया है, किसानों से वादाखिलाफी की है. पांच साल तक धान का बोनस देने का वादा किया लेकिन उसमें भी डंडी मार दी, सिर्फ 3 साल का ही बोनस दिया. स्कूल बनवाते हैं लेकिन शिक्षकों की व्यवस्था नहीं करते. अस्पताल बनाते हैं लेकिन डॉक्टरों का प्रबंध नहीं करते. रोजगार देने के बड़े-बड़े वादे हुए लेकिन बेरोजगारों की संख्या बढ़ाई. कांग्रेस मानती है कि अब इस सरकार से जनता मुक्त होगी. तभी राज्य का भला होगा.

कांग्रेस के उपर्युक्त आरोप मतदाताओं के गले तो उतर रहा है लेकिन यह आशंका भी है कि क्या गारंटी है कि कांग्रेस सुशासन के मार्ग पर चलेगी? कांग्रेस तो भ्रष्टाचार के आरोप से पहले ही दबी है तभी इतने सालों से सत्ता से बाहर है. मतदाता को गारंटी मिले तो उसकी आशंका दूर हो सकती है.

उधर, भाजपा 15 सालों में किए गए विकास कार्यों को अपना तुरुप का पत्ता मान रही है. पार्टी का हर नेता विकास कार्यों को पहले गिनाता है. इसके अलावा पार्टी अपनी सार्वजनिक वितरण प्रणाली ( PDS ) पर इतराती है. नक्सल समस्या पर अंकुश लगाने का दावा भी करती है. शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र के लिए किए गए कार्यों को भाजपा नेता गिना रहे हैं.

चावल वाले बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए डॉ रमन सिंह दावा करते है कि उनकी एक रुपए किलो चावल की स्कीम के कारण आज राज्य में कोई भी रात में भूखा नहीं सोता. महिलाओं एवं स्कूली छात्र छात्राओं के लिए लागू की गई कई योजनाओं को बताया जा रहा है. इसके साथ भाजपा के नेता कांग्रेस पर आरोप लगाने से भी नहीं चूक रहे हैं. छत्तीसगढ़ के मंत्री की CD जारी करने के लिए कांग्रेस को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं. इसके अलावा कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई को मतदाताओं को बताया जा रहा है.

जहां तक तीसरी पार्टी छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (जोगी) का प्रश्न है. यह पार्टी सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी के नेतृत्व में बनी इस पार्टी का प्रभाव कई सीटों पर है. बहुजन समाजवादी पार्टी के साथ छजका का गठबंधन होने के बाद इसका प्रभाव क्षेत्र बढ़ गया है. यह पार्टी कई स्थानों पर भाजपा कांग्रेस के प्रत्याशियों की मुश्किलें बढाएगी और अनुमान है कि यह पार्टी कुछ सीटों पर जीत भी हासिल कर सकती है. चुनावी मोर्चे पर पहली बार डटी आम आदमी पार्टी सभी दलों के लिए स्पीड ब्रेकर का काम करेगी. हर सीट जीतने वाले और हारने वाले प्रत्याशियों के वोट कम करने में यह दल सफल रहेगा.

बहरहाल, 20 नंबर को होने वाले मतदान पर सभी की नजर रहेगी. पूरे देश को 11 दिसंबर को परिणाम जानने की उत्सुकता रहेगी. देखना होगा कि भाजपा चौथी पारी के लिए सेलेक्ट होती है, या ‘परिवर्तन – लहर’ की गुगली भाजपा को आउट कर देती है और नई बैटिंग टीम को मौका देती है.

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