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दो टूक (श्याम वेताल) : चुनाव घोषणापत्र आकर्षक लेकिन अमल पहले साल से या पांचवें साल ?

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श्याम वेताल

छत्तीसगढ़ की 18 सीटों पर चुनावी शोर शनिवार 10 नवंबर की शाम थम गया. इन सीटों के लिए सोमवार को मतदान होना है. शनिवार को भाजपा ने अपना चुनावी घोषणा पत्र जिसे ‘अटल संकल्प पत्र’ का नाम दिया गया है, जारी कर दिया. जबकि कांग्रेस ने एक दिन पूर्व शुक्रवार को ही अपना घोषणापत्र जारी किया.

जहां तक दोनों दलों के घोषणा पत्रों का प्रश्न है, दोनों लोकलुभावन वादों से भरे पड़े हैं. मतदाता घोषणा पत्र को पढ़कर भ्रमित ही नहीं, आश्चर्य चकित भी होगा. मतदाता को दोनों घोषणा पत्र आकर्षित कर रहे हैं क्योंकि इसमें किसान, गरीब, मजदूर के लिए बहुत कुछ है. अभी तक इतने बड़े-बड़े वादे शायद ही हुए हों.

कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में किसान की नब्ज पहचान कर यह घोषणा की है कि सरकार आने के 10 दिनों के अंदर ही किसानों के कर्ज माफ कर दिए जाएंगे. किसान के लिए यह बहुत बड़ा आकर्षण है. इसके अलावा किसानों के धान का समर्थन मूल्य ₹2500 प्रति क्विंटल देने का वादा किया है. बोनस देने का भी आश्वासन दिया गया है. इतना ही नहीं 2 साल का बोनस जो भाजपा ने बकाया रखा है उसे भी चुकता करने का वादा कांग्रेस ने किया है.

कांग्रेस की ओर से अन्नदाता के लिए किए गए ये वादें सुनकर कृषक वर्ग गदगद हैं और उसकी आंखों में चमक आ गयी है. 60 साल से ऊपर के किसानों को पेंशन देने की कांग्रेस की योजना है जो एक अभिनव पहल है. हालांकि राहुल गांधी घोषणा पत्र जारी होने से पहले भी विभिन्न मंचों से ये वादे कर चुके हैं लेकिन चुनावी घोषणापत्र में भी ये वादे दर्ज होने से उनके भाषणों पर पक्की मुहर लग गई है.

कांग्रेस के लुभावने वादे में कृषक वर्ग की समस्याओं के अतिरिक्त दूसरी प्राथमिकता पर युवा वर्ग को फोकस किया गया है. युवा पीढ़ी की मुख्य समस्या रोजगार है. कांग्रेस का वादा है कि वह सत्ता में आयी तो हर घर को रोजगार मिलेगा. 10 लाख लोगों को रोजगार भत्ता भी देने का वादा है. इसके अलावा रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे. कांग्रेस ने बिजली बिल आधा करने की घोषणा कर उपभोक्ताओं के लिए राहत का रास्ता खोलने का वादा किया है. शिक्षा के क्षेत्र में कांग्रेस ने शिक्षकों के 50 हजार पदों को अविलंब भरने का आश्वासन दिया है.

इन वादों को देखकर मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग ‘परिवर्तन’ का मन बनाने को विवश जरूर होगा. लेकिन इन चुनावी वादों को कितने दिनों में पूरा किया जाएगा इसकी गारंटी पार्टी ने नहीं दी है. चुनाव घोषणापत्र के सिर्फ एक वादे कि 10 दिनों में किसानों का कर्ज माफ हो जाएगा के अलावा किसी वादे को पूरा करने की कोई समय सीमा नहीं तय की गई है.

जहां तक भाजपा के घोषणा पत्र का प्रश्न है. इसे जारी करने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह स्वयं रायपुर आए. घोषणा पत्र जारी करते समय अमित शाह ने राज्य में 15 साल की उपलब्धियों का बखान किया. ऐसा लगा कि अध्यक्ष जी घोषणा पत्र के वादों से ज्यादा पुरानी उपलब्धियों पर अधिक जोर देना चाहते हैं.

घोषणा पत्र की बात करें तो इसे ज्यादा आकर्षक नहीं माना जाएगा. इसमें राज्य को नक्सल मुक्त कराने का वादा है. ये वादा पिछले तीन चुनावों से भी किया गया लेकिन स्थिति आज भी जैसी थी वैसी ही है. घोषणापत्र में 2022 तक सबको आवास देने की बात कही गई है. ये वादा तो नरेंद्र मोदी पिछले 4 सालों से कर रहे हैं. इसमें लघु वनोपज का समर्थन मूल्य बढ़ाने की बात कही गई है. कहा गया है कि डेढ़ गुना बढ़ेगा लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि किस मूल्य का डेढ़ गुना होगा. छत्तीसगढ़ को जैविक खेती राज्य बनाया जाएगा लेकिन कब तक छत्तीसगढ़ को जैविक खेती राज्य बनाया बनेगा यह स्पष्ट नहीं है. निराश्रितों की पेंशन बढ़ेगी, कितना बढ़ेगी नहीं मालूम. हां, कक्षा 9वी में प्रवेश लेने वाले समस्त छात्र – छात्राओं को नि:शुल्क साइकिल दी जाएगी. एक अच्छी घोषणा है लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह घोषणा चुनाव जीतते ही लागू हो जाएगी और अगले पांच साल तक लगातार चलेगी ? इसी तरह मेघावी छात्रों को निशुल्क स्कूटी देने की योजना है. क्या यह भी पहले साल से शुरू हो जाएगी ? भाजपा ने घोषणा पत्र में पत्रकारों के लिए कल्याण बोर्ड का गठन और वकीलों के लिए एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने का वचन दिया है.

बहरहाल, घोषणापत्र में सभी वर्गों को खुश करने का प्रयास है लेकिन समय सीमा कोई नहीं है. वे अपने चुनावी वादे को पहले साल भी पूरा कर सकते हैं और पांचवे साल भी कर सकते हैं.

इसलिए अब ऐसी चुनावी घोषणा पत्र बनने चाहिए जिसमें हर वादे को पूरा करने की समय सीमा भी तय हो और उसका उल्लेख घोषणापत्र में ही किया जाए तभी पारदर्शिता आयेगी और राजनीतिक दलों पर जिम्मेदारी का बोझ भी पड़ेगा.

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