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बीजेपी से नीतीश के हाथ मिलाने से प्रशांत किशोर को हुआ नुकसान

पटना: बिहार में नीतीश कुमार के महागठबंधन से अलग होकर बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने से लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के अलावा प्रशांत किशोर को भी नुकसान होता दिख रहा है. सूत्रों का कहना है कि बीजेपी-जेडीयू की एनडीए सरकार बनते ही प्रशांत किशोर से कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी छिन गया है. साथ ही प्रशांत के लिए नीतीश कुमार के घर के दरवाजे भी बंद हो गए हैं, जहां वे पटना आने पर ठहरते थे. पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए काम करने के दौरान प्रशांत किशोर ने पटना छोड़ दिया था. सूत्रों का कहना है कि पंजाब में कांग्रेस के अमरिंदर सिंह को सीएम की कुर्सी तक पहुंचाने के बाद अप्रैल में पटना लौटने पर प्रशांत किशोर केवल सात घंटे यहां रुके थे. नीतीश के लिए प्रशांत ने बनाई थी रणनीति: 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने बीजेपी की जीत के लिए रणनीति तैयार की थी. हालांकि सरकार गठन के बाद उनका अमित शाह के साथ अच्छे संबंध नहीं रह गए थे. इसके बाद साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले प्रशांत किशोर से नीतीश कुमार ने संपर्क किया. लोकसभा चुनाव में करारी हार झेलने के बाद नीतीश कुमार अपनी खोई हुई राजनीतिक ताकत हासिल करने की जुगत में थे. 40 वर्षीय प्रशांत किशोर की बनाई रणनीति का नीतीश कुमार को काफी फायदा हुआ. लालू यादव और कांग्रेस के साथ मिलकर नीतीश कुमार भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की. इस जीत के बाद प्रशांत किशोर कुर्ता-पायजामा पहने हुए नीतीश कुमार के साथ उनके आवास पर मीडिया से मुखातिब हुए थे. महागठबंधन टूटने से निराश है प्रशांत किशोर: सूत्रों का कहना है कि प्रशांत किशोर महागठबंधन के टूटने से निराश हैं. उनका कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद का चेहरा बन सकते थे. बीजेपी के साथ हाथ मिलाने के बाद उनकी कई संभावनाओं पर पानी फिर गया है. इन दिनों दक्षिण भारत में किसी काम में व्यस्त प्रशांत किशोर ने महागठबंधन से नीतीश कुमार के अलग होने की घटना पर कुछ भी खुलकर कहने से मना कर दिया है. हालांकि उन्होंने नीतीश कुमार को नई सरकार गठन के लिए फोन पर बधाई दी है.

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