कार्यकर्ता नहीं बल्कि सत्ता और संगठन में बैठे लोगों की गलत नीतियों से हारे चुनाव: पुनाराम वर्मा

एक ओर प्रदेश भाजपा के नेता आगामी चुनाव को लेकर अपनी ज़िम्मेदारी तय कर रहे है वही दुसरी ओर निचले स्तर के कार्यकर्ता निराश एवं असहाय नजर आ रहे हैं

निलेश गोयल

खरोरा:- विधानसभा चुनाव मे मिली करारी हार के बाद भाजपा मे चुनावी समीक्षा एवं मंथन के साथ साथ आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारी की जा रही है।

विधानसभा चुनाव मे मिली बड़ी शिकस्त के बावजूद भाजपा के लोगो द्वारा संगठन मे बिना कोई बदलाव के ही लोकसभा चुनाव जितने का दंभ भरा जा रहा है।

एक ओर प्रदेश भाजपा के नेता आगामी चुनाव को लेकर अपनी ज़िम्मेदारी तय कर रहे है वही दुसरी ओर निचले स्तर के कार्यकर्ता निराश एवं असहाय नजर आ रहे हैं, जिन्हे अब प्रदेश मे मोदी लहर से ही कुछ कमाल होने की उम्मीद है।

इधर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष धरम लाल कौशिक व्दारा भाजपा कार्यकर्ताओं के काम न करने से मिली हार के बयान को लेकर भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ताओं मे नराजगी साफ साफ नजर आ रही है।

प्रदेश अध्यक्ष के बयान से अपने आप को ठगा सा महसूस करने वाले कार्यकर्ता अब बगावती सुर अपनाते हुए सत्ता और संगठन पर बैठे रहे लोगो के गलत नितियो और कार्यकर्ताओ के प्रति अपनाये गये गलत रवैय्ये को ही हार का कारण बता रहे हैं।

पार्टी के बैठकों मे धान का समर्थन मुल्य बढाने एवं बोनस देने के वादे को पुरा करने की माँग करने वाले कार्यकर्ताओं से इस्तीफ़े की पेशकश करते थे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष धरम लाल कौशिक – भाजपा किसान नेता पुनाराम वर्मा

भाजपा जिला रायपुर ग्रामीण किसान मोर्चा के वरिष्ठ नेता भरूवाडीह के पुर्व सरपंच पुनाराम वर्मा ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष धरम लाल कौशिक के उक्त बयान की निंदा करते हुए कहां की पार्टी के बैठकों मे किसानों की समस्याओं को उठाने वाले कार्यकर्ताओं की बातो को नज़र अंदाज़ किया जाता था।

बोनस और पच्चीस सौ रूपये समर्थन मुल्य के वादे को पुरा करने की माँग करने वाले कार्यकर्ताओं से प्रदेश अध्यक्ष धरम लाल कौशिक व्दारा इस्तीफ़े की पेशकश कर उन्हे चुप करा दिया जाता था।

रमन सरकार व्दारा किसानों को 2 वर्षों का बोनस न देना, धान का समर्थन मूल्य न बढ़ाना ये वादा खिलाफी था। साथ ही मोबाईल और टिफ़िन बाँटने का सरकार का फ़ैसला भी गलत था।

सत्ता और संगठन मे बैठे लोगो के इन्हीं गलत नीतियों और शक्त रवैये के कारण ही हमे हार का सामना करना पढा इसके बावजूद भी हार का ज़िम्मेदारी कार्यकर्ताओं पर डालना ये गलत है।

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