छत्तीसगढ़

चुनावी समीकरण हुआ पेचीदा, रतन व पवन पर टिकी सबकी नजरें…..अटकलों का बाजार तेज

अरविंद शर्मा:

कटघोरा: कटघोरा नगरीय निकाय चुनाव में राजनैतिक हथकंडे और दावपेंच की राजनीति शुरू हो चुकी है।दोनों प्रमुख पार्टियों के प्रत्याशियों का जनसंपर्क लगातार वार्डो में सघन रूप से जारी है।चुनाव को लेकर कई उम्मीदवारो को टिकट नही मिलने से नाराजगी बनी हुई थी और कई प्रत्यासी तो पार्टी से बगावत कर निर्दलीय के रूप में चुनावी मैदान में उभरे हैं अब इस बगावती तेवर में आखिरकार चुनावी समीकरण कितना प्रभावित होगा?

कांग्रेस पार्टी से रतन मित्तल

कांग्रेस पार्टी से रतन मित्तल का चुनावी मैदान में आ जाने से सबकी नजरें अटक गई है।अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगर रतन मित्तल चुनाव जीत गए तो इनका अध्यक्ष बनना तो तय है।इनका राजनीति से पुराना नाता रहा है सन 2009 में नगर पंचायत अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 2019 के चुनाव में पार्टी से काफी मशक्कत करने के बाद पार्षद टिकट हासिल हुई है।वैसे इस बार के चुनाव मित्तल के आ जाने से भाजपा की राह आसान नही रहेगी।

भाजपा से पवन अग्रवाल

दूसरी ओर भाजपा से चुनावी मैदान में वार्ड 9 से पवन अग्रवाल ने कमान संभाली है।असम्भव कार्य को संभव करने वाले जुझारू नेता से हर कोई वाकिफ है अगर पार्षद चुनाव जीते तो मित्तल को कड़ी टक्कर दे सकते हैं और नगर के विकास को आगे बढ़ाते हुए अध्यक्ष पद की कमान सम्हाल सकते हैं।लगातार कटघोरा में कुछ नया करने की चाह रखने वाले पवन अग्रवाल तेजतर्रार होने के साथ नगर के विकास में कोई समझौता नही करते हैं।यदि ऐसी शख्सियत को जनता ने मौका दिया तो शायद पूरे नगर का कायाकल्प हो सकता है।

इस बार की चुनावी राह दोनो पार्टियों के लिये बेहद कांटो भरी हो सकती है।कांग्रेस की नीति और कार्यो का मंजर किसी से छुपा नही है। खैर नगरीय निकाय चुनाव में सिम्बाल उतना कारगर नही होगा मतदाता विश्वसनीय प्रत्यासी को ही वार्ड की जिम्मेदारी दे सकते हैं।अगर मतदाताओ ने विवेक से निर्णय लिया और सही हाथों में नगर की बागडोर थमाई तो नगर के विकास में तेजी आ सकती है अन्यथा कटघोरा नगर आज जिस गड्डामय धुर्रामय परिस्थिति से गुजर रहा है आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है।

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