अंतर्राष्ट्रीय

एक नया विधेयक लेकर आई इमैनुएल मैक्रों सरकार, पढ़े पूरी खबर

'इस्लामिक कट्टरवाद' पर लगाम लगाने के लिए फ्रांस ने एक और बड़ा कदम उठाया

पेरिसइमैनुएल मैक्रों सरकार की कोशिश ऐसे अवैध स्कूलों पर नकेल कसने की है, जहां किसी खास एजेंडे के तहत पढ़ाई कराई जाती है. फ्रांस में रहने वाले सभी धर्मों के लोगों के लिए तीन साल के बच्चों को स्कूल भेजना अनिवार्य होगा. बच्चों की होम-स्कूलिंग की इजाजत सिर्फ खास परिस्थितियों में दी जाएगी.

इसके तहत सरकार एक नया विधेयक लेकर आई है, जिसके तहत तीन साल की उम्र से ही बच्चों को स्कूल भेजना अनिवार्य होगा. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का कहना है कि यह बिल राष्ट्र को कमजोर करने वाले अलगाववादियों को जड़ से खत्म करने में कारगर साबित होगा और बच्चों को शुरुआत से ही सही शिक्षा प्रदान की जा सकेगी. बता दें कि पेरिस की घटना के बाद से मैक्रों इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठा रहे हैं. जिसकी वजह से तुर्की और पाकिस्तान सहित मुस्लिम देशों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

Supporting Republican Principles के जरिए बच्चों को घर पर या मस्जिदों में पढ़ाई करने से रोका जाएगा. राष्ट्रपति का मानना है कि इससे फ्रांस के मूल्यों के खिलाफ किसी विचारधारा को बढ़ावा देने की कोशिशों को खत्म करने में मदद मिलेगी. बिल में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग स्विमिंग पूल्स की व्यवस्था खत्म करने का भी जिक्र है.

Judge को होगा ये अधिकार विधेयक में कहा गया है कि मस्जिदों को पूजास्थल के तौर पर रजिस्टर किया जाएगा ताकि उनको बेहतर तरीके से पहचाना जा सके. इसके अलावा, न्यायाधीश के पास आतंकवाद, भेदभाव, नफरत या हिंसा के दोषी करार दिए गए व्यक्ति को मस्जिद जाने से रोकने का अधिकार होगा. विदेशी फंडिंग पर नजर रखने का भी प्रावधान बिल में किया गया है. कानून लागू होने के बाद 10 हजार यूरो से ज्यादा विदेशी फंडिंग पर उसके बारे में पूरी जानकारी देनी होगी.

Virginity Certificate दिया तो होगी जेल जबरन शादी रोकने के लिए भी प्रस्तावित कानून में प्रावधान किया गया है. साथ ही यह भी कहा गया है कि ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी को महिलाओं को Virgin होने का सर्टिफिकेट प्रदान करते हैं. दोषी पाए जाने पर डॉक्टर को एक साल की जेल भी हो सकती है.

हालांकि, विधेयक में सीधे तौर पर इस्लाम या मुस्लिमों का जिक्र नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि पेरिस की घटना के बाद मुस्लिमों को ध्यान में रखकर ही यह बिल तैयार किया गया है. फ्रांस के इस कदम से मुस्लिम देशों का भड़कना लगभग तय है.

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