ज्यादा से ज्यादा किसानों को सोलर सिंचाई पम्प लेने के लिए प्रोत्साहित करें : रमन

रायपुर: मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज शाम यहां विधानसभा परिसर स्थित नवीन समिति कक्ष में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया। पुस्तिका में प्राधिकरण की उपलब्धियों का सचित्र विवरण दिया गया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इस प्राधिकरण की स्थापना वर्ष 2012 में की गई थी। उनकी अध्यक्षता में आज प्राधिकरण की दसवीं बैठक भी विधानसभा के नवीन समिति कक्ष में आयोजित की गई। डॉ. सिंह ने जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में प्राधिकरण क्षेत्र के अंतर्गत स्वीकृत और निर्माणाधीन कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि राज्य शासन द्वारा सौर सुजला योजना के तहत पूरे प्रदेश में 51 हजार किसानों को नाम मात्र की कीमत पर सोलर सिंचाई पम्प देने का लक्ष्य है। इसके अंतर्गत अब तक लगभग 36 हजार सोलर सिंचाई पम्प स्वीकृत किए जा चुके है और उनमें से 25 हजार किसानों के खेतों में इनकी स्थापना की जा चुकी है। ये सोलर सिंचाई पम्प किसानों की सिर्फ सात हजार से 20 हजार रूपए तक अंशदान लेकर दिए जा रहे हैं।

राज्य सरकार ने यह तय किया है कि प्राधिकरण मद की राशि से अब अधिक से अधिक किसानों को सोलर सिंचाई पम्प स्वीकृत किए जाएं। डॉ. सिंह ने प्राधिकरण क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्र के ज्यादा से ज्यादा किसानों को इस योजना से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करें। इस वर्ष सौर सुजला योजना के तहत सोलर पम्प स्थापना का शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण करने की दिशा में तेजी से काम करने की जरूरत है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2012 में राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण की स्थापना से लेकर अब तक विभिन्न बैठकों में प्राधिकरण की राशि से चार हजार 893 किसानों के सिंचाई पम्पों को बिजली का कनेक्शन देने के लिए 24 करोड़ रूपए मंजूर किए गए।

इनमें से अब तक चार हजार 744 सिंचाई पम्पों का विद्युतीकरण किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों से कहा कि वित्तीय वर्ष 2015-16 के अपूर्ण कार्यों को मार्च 2018 तक और वर्ष 2016-17 के अपूर्ण कार्यों को जून 2018 तक पूर्ण कर लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा-राज्य सरकार ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए वर्ष 2004 में सरगुजा और उत्तर क्षेत्र तथा बस्तर एवं दक्षिण क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरणों का और अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों के लिए अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण का गठन किया था। उसी कड़ी में मैदानी क्षेत्रों के लिए वर्ष 2012 में राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण की स्थापना की गई।

ये सभी प्राधिकरण मिनी केबिनेट की तरह काम करते हैं, जिनमें जनप्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श कर जनता की जरूरतों के अनुरूप स्थानीय महत्व के अनेक विकास के कार्यों को मंजूरी दी जाती है। डॉ. सिंह ने इस बात पर खुशी जताई कि वर्ष 2012 में गठित राज्य ग्रामीण एवं पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा अपनी स्थापना के सिर्फ पांच -छह वर्ष के भीतर 352 करोड़ 08 लाख रूपए के कुल सात हजार 390 कार्य मंजूर किए जा चुके हैं।

इनमें से 69 करोड़ 34 लाख रूपए की लागत से गांवों में सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए एक हजार 659 मंगल भवनों का निर्माण भी पूर्ण कर लिया गया है। इसके अलावा विभिन्न ग्राम पंचायतों में 123 करोड़ 14 लाख रूपए के सीसी रोड भी स्वीकृत किए गए हैं। राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा अपनी विगत 9 बैठकों में 45 महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें से 38 निर्णयों पर अमल पूर्ण कर लिया गया।

 

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