इंजीनियर ने तलाकशुदा पत्नी के नाम की बेशकीमती जमीन, धोखे से बेच दी

अजय शर्मा

बिलासपुर।

रेलवे ब्रिज इंजीनियर ने तलाकशुदा पत्नी के नाम पर दर्ज बेशकीमती जमीन को धोखे से बेच दिया। मामले में जब पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो महिला ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट के आदेश पर सिविल लाइन पुलिस ने आरोपी इंजीनियर के खिलाफ धोखाधड़ी का जुर्म दर्ज कर लिया है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार सरकंडा थाना क्षेत्र के जगन्नाथ पुरम निवासी सपना श्रीवास्वत पिता राधिका श्रीवास्तव (42) की शादी रायपुर के खारुन विहार कॉलोनी निवासी रमाकांत श्रीवास्तव से हुई थी। रमाकांत ब्रिज इंजीनियर के पद पर रेलवे आफिस रायपुर में पदस्थ है।

घरेलू विवाद पर कुटुम्ब न्यायालय शहडोल से 1 नवंबर 2012 को दोनों का तलाक हो चुका है। महिला के नाम पर सिरगिट्टी पहनं 30 में खसरा नंबर 1061 रकबा- 0.09 एकड़, खसरा नंबर 624/40 रकबा 0.04 एकड़, मौजा महमंद पहनं 2 रानिमं बिलासपुर में स्थित ख.नं. 19/14 रकबा- 0.02-3/4 एकड़, मौजा दोमुहानी पहनं 24 रानिमं बिलासपुर में स्थित ख. नं. 133/189 रकबा- 0.03-1/4 एकड़ भूमि थी। सभी जमीन को आरोपी इंजीनियर रमाकांत ने धोखे से पॉवर आॅफ अटार्नी बनवाकर बेच दी।

-इस तरह से झांसा देकर बनवाई पावर आॅफ अटार्नी

महिला के अनुसार तलाक के बाद रमाकांत ने उसे झांसा दिया कि वह एक लिखित एग्रीमेंट का पंजीयन कराएगा और उसे एकमुश्त 10 लाख की स्थाई भरण-पोषण राशि देगा। महिला उसके झांसे में आ गई और उसके कहने पर वह रजिस्ट्री आफिस बिलासपुर चली गई। यहां उसे धोखे में रखकर उसकी सारी जमीन की पावर आॅफ अटार्नी अपने नाम पर बनवा ली।

-रजिस्ट्री आॅफिस में तलाक को छिपाया

महिला के अनुसार इंजीनियर रमाकांत ने पंजीयन आॅफिस में पति-पत्नी के बीच हुए तलाक को छिपाया और उसने सभी जमीन को अपने नाम पर करा लिया। इसके बाद सभी जमीन को अलग-अलग लोगों को बेच दिया। इसके एवज में मिली रकम को अपने पास रख लिया।

-नकल निकलवाने गई, तब चला पता

खुद की जमीन तलाकशुदा पति के नाम पर चढ़ने और बाद में दूसरों को बेचने की जानकारी पहले महिला को नहीं थी। जब वह जरूरी काम से जमीन की नकल निकवालने गई, तब उसे पता चला कि उसके नाम पर कोई संपत्ति नहीं है।

-10 लाख का एग्रीमेंट भी किया

पुलिस के अनुसार आरोपी रमाकांत ने महिला को यह भी झांसा दिया कि वह उसे स्थाई भरण पोषण के रूप में दस लाख रुपए का चेक अलग से दे रहा है और इसके लिए एक एग्रीमेंट भी बनवाया, जिसमें अपने शहडोल के बैंक एकाउंट का उल्लेख किया, किंतु चेक का नंबर बिलासपुर स्थित संयुक्त बैंक खाते का एग्रीमेंट में उल्लेखित किया और यह रकम भी आवेदिका को नहीं दी।

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