विभिन्न मुद्दों को आसान बनाने के लिय सीखी जानी चाहिए अंग्रेजी भाषा

श्री साई बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय द्वारा द्वितीय भाषा के रूप में अंग्रेजी भाषा अध्ययन की चुनौतियाँ विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार में देश के ख्यातिलब्ध विद्धानों ने अपने विचार रखते हुए कहा कि वैश्वीकरण के इस युग में अंग्रेजी भाषा का अध्ययन आवश्यक है अंग्रेजी भाषा विभिन्न देशों के बीच संचार का सबसे महत्वपूर्ण भाषा है। विभिन्न राजनीतिक सामाजिक संास्कृतिक और धार्मिक मुद्दों को आसान बनाने के लिय अंग्रेजी भाषा सीखी जानी चाहिए। आज के इस दौर में अंग्रेजी भाषा के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। अंग्रेजी सीखने के लिए व्यवहार में एवं विचारों में परिवर्तन लाना होगा।

महाविद्यालय के आई क्यू ए.सी और कला एवं समाज कार्य विभाग द्वारा द्वितीय भाषा के रूप में अंग्रेजी भाषा अध्ययन की चुनौतियाँ विषय पर बेबीनार का आयोजन किया गया। प्रारंभ में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने वेबीनार के विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए अतिथि विद्वानों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा कहा कि वैश्वीकरण के इस युग में अंग्रेजी भाषा का अध्ययन आवश्यक है अंग्रेजी भाषा विभिन्न देशों के बीच संचार का सबसे महत्वपूर्ण भाषा है।

अतिथि वक्ता एम. ई. एस. असमानी कॉलेज कोडूंगलूर केरल के एसोशियर प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मुरली कृष्णन टी. आर. ने कहा कि आधुनिक युग में दुनिया भर में यह आम बात है कि विभिन्न राजनीतिक सामाजिक संास्कृतिक और धार्मिक मुद्दों को आसान बनाने के लिय अंग्रेजी भाषा सीखी जानी चाहिए। अंग्रेजी भाषा एक जोड़ने वाली भाषा है भूमंडलीकरण के इस दौर में भारतीयों को अपनी आँखे अन्द नहीं करना चाहिए और अंग्रेजी भाषा को अपनाना चाहिए। अपने उद्बोधन में राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अम्बिकापुर के सहायक प्राध्यापक विभागाध्यक्ष अंग्रेजी विभाग डॉ. राजकमल मिश्रा ने कहा कि अंग्रेजी भाषा ने भारतीय जनमानस पर एक अमिर छाप छोड़ी है इसलिए में अंग्रेजी भाषा के साथ एक विदेशी अथवा गैर भाषा के रूप व्यवहार नहीं किया जा सकता शिक्षा, दर्शन, विज्ञान, प्रौद्योगिकी आदि विषयों को इस भाषा के माध्यम से बेहतर समझा सकता है।

अपने सारगर्भित उद्बोधन मे अंग्रेजी विभाग वसन्ता कॉलेज वाराणसी (उ.प्र.) की सहायक प्र्राध्यापक डॉ. मंजरी शुक्ला ने भाषा को भावों की अनुगामिनी बताया। उन्होने कहा कि यद्यपि भाव एवं विचार मातृभाषा मे ही जागृत होते हैं। किन्तु आज के इस दौर में अंग्रेजी भाषा के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। अंग्रेजी सीखने के लिए व्यवहार में एवं विचारों में परिवर्तन लाना होगा।

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