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सबसे बड़ी धोखाधड़ी? 50 लाख लोगों से 7000 करोड़ की ठगी, PCL के 6 डायरेक्टरों पर केस

दादर पुलिस स्टेशन में 40,000 रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया

सबसे बड़ी धोखाधड़ी? 50 लाख लोगों से 7000 करोड़ की ठगी, PCL के 6 डायरेक्टरों पर केस

मुंबई की संभवतः सबसे बड़ी धोखाधड़ी के एक मामले में इकनॉमिक ऑफेंसेज विंग (ईओडब्ल्यू) ने पैनकार्ड क्लब्स (पीसीएल) केस की जांच का जिम्मा अपने हाथ में ले लिया है। यह मामला कथित तौर पर 50 लाख से ज्यादा निवेशकों के करीब 7,035 करोड़ रुपये ठगने का है। इससे पहले, बाजार नियामक संस्था सिक्यॉरिटीज ऐंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने पीसीएल को अपनी प्रॉपर्टीज नहीं बेचने का निर्देश दिया था। इसने पीसीएल की संपत्तियां बेचकर निवेशकों के पैसे लौटाने के मकसद से बिक्री प्रक्रिया अपनाने के लिए रिटायर्ड जज आर एम लोढ़ा को नियुक्त किया था।

इकनॉमिक ऑफेंसेज विंग के ऑफिसर ने कहा कि एजेंसी ने इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। साथ ही, पीसीएल और इसके छह डायरेक्टरों के खिलाफ महाराष्ट्र प्रॉटेक्शन ऑफ इंट्रेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स (एमपीआईडी) की धाराएं भी लगाई गई हैं।

51 लाख लोगों को ऐसे लगाया चूना
एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘प्रभादेवी स्थित उनका हेड ऑफिस अब बंद कर दिया गया है।’ दादर निवासी नरेंद्र वातौकर ने 10 दिसंबर को पीसीएल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। एक अधिकारी ने बताया, ‘पीसीएल होटल में ठहरने की एक स्कीम लाया था। वह लोगों को मेंबरशिप देकर निवेश करने को कहता था। इसके लिए वह इन होटलों में हॉलिडे पैकेज ऑफर कर रहा था।’

नहीं ली थी सेबी की अनुमति
जिन निवेशकों से बंपर रिटर्न्स के वादे किए गए थे, उन्हें हॉलिडे पैकेज नहीं मिले। ऐसे में एक इन्वेस्टर ने सेबी से शिकायत कर दी और मामले की जांच शुरू हो गई। जांच में पता चला कि कंपनी सामूहिक निवेश योजना (सीआईएस) चला रही थी जिसके लिए सेबी से अप्रूवल लेना जरूरी था, लेकिन डायरेक्टर्स ने अनुमति नहीं ली थी। जांच में खुलासा हुआ कि महज 1 प्रतिशत निवेशकों को ही वादे के अनुसार होटल स्टे की सुविधा दी गई थी।

अटैच हुईं कंपनी की प्रॉपर्टीज
सेबी ने पहले कंपनी पर पाबंदी लगा दी और उसे बिजनस बंद करने को कहा। सेबी ने कंपनी से कहा कि वह अब किसी से पैसे नहीं ले सकती है और उसे तीन महीने के अंदर निवेशकों के पैसे हर हाल में लौटाने होंगे। सेबी ने उसे अपनी एक भी प्रॉपर्टी बेचने से भी रोक दिया। पीसीएल ने सेबी के इस आदेश को सिक्यॉरिटीज अपेलट ट्राइब्यूनल (एसएटी) में चुनौती दी, लेकिन एसएटी ने भी सेबी के आदेश पर मुहर लगा दिया।

पीसीएल में देश के विभिन्न हिस्से से लोगों ने निवेश किया है और इनमें ज्यादातर मध्यवर्गीय परिवारों से हैं। कंपनी निवेशकों के 7,000 करोड़ रुपये लौटाने के सेबी के निर्देशों का पालन करने में असफल रही जिसके बाद उसकी प्रॉपर्टीज अटैच करने का सिलसिला शुरू हो गया। सेबी पीसीएल की 34 संपत्तियों की कुर्की कर चुकी है। साथ ही उसने, कंपनी के 250 से ज्यादा बैंक खाते फ्रीज कर दिए। कुर्क की गई संपत्तियों में देशभर के लैंड पार्सल्स, रिजॉर्ट्स, बिल्डिंग्स और ऑफिस स्पेस शामिल हैं।

इकनॉमिक ऑफेंसेज विंग के हाथ में केस
इकनॉमिक ऑफेंसेज विंग के एक अधिकारी ने बताया, ‘एक निवेशक दादर पुलिस स्टेशन में 40,000 रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया। उसके अलावा, 82 अन्य निवेशकों ने इकनॉमिक ऑफेंसेज विंग से संपर्क कर पीसीएल के खिलाफ ऐसी ही शिकायतें कीं। सेबी अधिकारियों ने इकनॉमिक ऑफेंसेज विंग को कहा कि पीसीएल ने 51 लाख निवेशकों से 7,035 करोड़ रुपये जुटाए हैं। हमने पुलिस स्टेशन से जांच की जिम्मेदारी ले ली है और केस से संबंधित दस्तावेज जुटाने जा रहे हैं। साथ ही, पीड़ितों के बयान भी लिए जाएंगे।’

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