गुरुसत्ता अध्यात्मिक संस्थान के द्वारा किया चंकेश्वरी शक्तिपीठ की स्थापना

तामेश्वर साहू

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ राज्य के प्रयाग राज कमल क्षेत्र पद्मापुरी नगरी राजिम से पूर्व दिशा में 16 किलो मी दुरी पर गुरुसत्ता अध्यात्मिक संस्थान तरिघाट (राजिम )स्थित है, जहां चंकेश्वरी शक्तिपीठ की स्थापना की गई है। भौगौलिक दृष्टीकोण से पूर्व में सरगी नदी (सरयू नदी)एवं आमराई से आन्छदित है पश्चिम में बहरा नार दक्षिण में उपजाऊ धरती तो वही उत्तर में महुआ वृक्षों का सघन प्राकृतिक सौंदर्य आन्छदित है ।

संस्थान की स्थापना 1989 – 90 में संस्था के संचालक डॉ आनंद मतावले (गुरूजी ) ने किया ग्राम तरिघाट सरयू नदी के घाट के ऊपर बसा है वर्तमान में 1600 की जनसँख्या जिसमे सभी समाज के लोग निवासरत है ।

डॉ. आनंद मतावले गुरूजी (संक्षिप्त परिचय ):-डॉ. मतावले जी का जन्म 20 जुलाई 1968 में एक संपन्न कृषक परिवार में हुआ पिता श्री घासीदास एवं माता श्रीमती सोनबती मतावले के तृतीय पुत्र परिवार के अन्य सदस्यों में सबसे विरले रहे है जन्म से ही उनमे विलक्षणता विद्यमान रही थी।

शिक्षा -दीक्षा :-माध्यमिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर एवं स्नातक ,बी .ई श्री गोविंद राम सक्सेरिया इंस्टिट्यूट टेक्नोलोजी इंदौर (मध्यप्रदेश )में हुआ बी .ई के तृतीय वर्ष में ही अचानक से आये घटनाक्रमों ने आध्यात्मिक क्षेत्र की ओर रुख मोड़ दिया।

शिक्षा के उपरान्त ग्राम मारकाटोला कंकालिन में समाधिस्थ राजाराव के सूक्ष्म संम्प्रेशन से तंत्र ज्ञान लिया 1994 में डॉ. श्री नारायणदत्त श्रीमाली (स्वामी निखिलेश्वरनन्द जी ) से दीक्षा प्राप्त कर समाज सेवा एवं अध्यात्म में प्रवेश किया।

पूज्य गुरूदेव अपने दिव्य ज्ञान से जनमानस की समस्याओ का समाधान करते आ रहे है ।भारत की प्रांच्या विधाओ अध्यात्म ,ज्योतिष ,आयुर्वेद जैसे विषयो का ज्ञान जानने वाले पूज्य गुरूदेव डॉ आनंद जी प्रति बुधवार अपने निज निवास ग्राम तरीघाट ( राजिम ) छः ग.में , प्रातः 10:30 से शाम 04:30 तक उपलब्ध होते है !! व जीवन के विभिन्न जटिल समस्याओं का समाधान सीधे संपर्क कर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते है।

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